शहर के अशोक मार्ग पर कुत्तो का झुंड। संवाद
सिद्धार्थनगर। खूंखार आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की गंभीरता यूं ही नहीं है। हकीकत यह है कि ऐसे कुत्तों ने लोगों की नाक में दम कर रखा है। यह सबसे अधिक बच्चों और बुजुर्गों पर हमला कर रहे हैं। इनके आतंक से बच्चों ने गली-मोहल्लों में खेलना तक बंद कर दिया है।
हालात यह हैं कि अभिभावकों को स्कूल वैन या फिर ई-रिक्शा तक बच्चों को छोड़ने और लाने जाना पड़ता है। अभी 15 दिन पहले त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र के लेडसर में विद्यालय जा रहे पांच साल के बच्चे को कुत्तों ने घेरकर नोच डाला था। इस हमले में वह किसी प्रकार से बचा और उसका इलाज हुआ। यही नहीं, अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने वाले पीड़ितों के रिकाॅर्ड बता रहे हैं कि जनपद में कुत्तों का हमला बढ़ा है।
जानकार बताते हैं कि अधिक गर्मी में वह बैचेन हो उठते हैं। खाने के लिए कुछ मिलता नहीं है और जहां जाते हैं लोग मारते और भागते हैं। कई बार मार देने से चोटिल हो जाते हैं, इसलिए उनका व्यवहार और बदल जाता है और काटने के लिए दौड़ते हैं। इंसान के साथ ही सिवान में घूमने वाले पशुओं पर भी हमला कर देते हैं। खुद और बच्चों के साथ पशुओं पर भी ध्यान देने की जरूरत है, जिससे इनके हमले से बचा जा सके।
मेडिकल कॉलेज और सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर रेबीज का इंजेक्शन लगवाने के लिए प्रतिदिन पहुंचने वाले 30-35 मरीज हालात की गवाही के लिए काफी हैं।
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