सिद्धार्थनगर। हांगकांग में सोथबी नीलामी कंपनी की ओर से पिपरहवा से प्राप्त अवशेषों की नीलामी रुकने के बाद अब उसे भारत में लाने की मांग तेज हो गई है। जिले के लोगों को कहना है कि इस अवशेषों के भारत में आने से देश के साथ जिले का भी गौरव बढ़ेगा। बुद्ध कालीन पुरावशेष को आने से जिले में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। कपिलवस्तु क्षेत्र के पिपरहवा स्तूप से प्राप्त बुद्ध कालीन पुरावशेष को ब्रिटिश इंजीनियर विलियम क्लैक्सटन पेप्पे ने 1898 में लगभग 331 रत्न औपनिवेशिक अनुमति से इंग्लैंड ले गया था। इसे उसके वंशजों की ओर से लगभग तीन माह पहले इंग्लैंड के सोथबी नीलामी कंपनी के माध्यम से हांगकांग से सात मई को नीलाम करवाने की तैयारी थी।
इसे अभियान चलाकर रोका गया। नीलामी रुकने के बाद इस अब भारत में वापस लाने की मांग भी तेज हो गई है। जिले के लोगों को कहना है कि नीलामी रुकने से देश का सम्मान बच गया है। लेकिन, यदि इसे वापस निर्धारित स्थान पर रखा जाए तो पर्यटक भी इसके दर्शन कर सकेंगे और क्षेत्र को इसका लाभ मिलेगा। पर्यटन के दौरान लोग इसे नजदीक से देखकर महसूस कर पाएंगे।
जिले में कई देशों के पर्यटक के साथ बुद्ध के अनुयायी पिपरहवा स्तूप को देखने के लिए आते हैं। ऐसे में इन पुरावशेषों को भी रखा जाए तो पर्यटक बुद्ध कालीन पुरावशेष को करीब से देख पाएंगे।