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64 अति संवेदनशील गांवों में चलेगा विशेष अभियान

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64 अति संवेदनशील गांवों में चलेगा विशेष अभियान
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प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री दो सितंबर से अभियान की शुरूआत करेंगे
बीमारी को जड़ से खत्म करने की तैयारी पूरी, जेई-एईएस से प्रभावित गांव शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। जिले के जेई/एईएस से प्रभावित 64 गांवों में विशेष अभियान चलेगा। इन गांवों में स्वास्थ्य कर्मियों से लेकर आशा, आंगनबाड़ी वर्कर, कृषि विभाग सहित मलेरिया विभाग की पूरी टीम लोगों को जागरूक करेगी। दो सितंबर से अभियान की शुरूआत स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह करेंगे। इसकी तैयारियां भी पूरी हो चुकी है। उद्देश्य है कि जेई/एईएस को इन गांवों से जड़ से खत्म किया जा सके।
जिला इंसेफेलाइटिस से प्रभावित है। हर साल सैकड़ों बच्चे जेई/एईएस से प्रभावित होकर दिव्यांगता का शिकार होते हैं। इसे लेकर मुख्यमंत्री योगी सरकार ने सर्वे कराया तो यह बात सामने आई कि गंदगी की वजह से ये बीमारियां फैल रही हैं। इस पर मुख्यमंत्री ऐसे गांवों को चिह्नित करने का निर्देश दिया, जहां सबसे अधिक लोग जेई/एईएस से पीड़ित हैं। प्रशासन की ओर से ऐसे गांवों की सूची बनाई गई। इन गांवों में प्रशासन की पूरी टीम दस्तक अभियान के तहत हर घर जाकर लोगों को जेई/एईएस के प्रति जागरूक करेगी। साथ ही नवकी बीमारी के बारे भी बताएगी। इतना ही नहीं अलग-अलग विभागों को इसके लिए जिम्मेदारियां भी बांटी गई हैं। सीएमओ आरके मिश्रा ने बताया कि दो सितंबर से अभियान की शुरूआत होगी। इसके लिए सभी को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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गांवों में फॉगिंग के साथ स्वच्छता पर होगा जोर
जिला मलेरिया अधिकारी एके मिश्रा ने बताया कि दो सिंतबर से इन गांवों में दस्तक अभियान की शुरुआत की जाएगी। इन गांवों में फॉगिंग, ब्लीचिंग पाउडर आदि डाले जाएंगे। साथ ही हर घर जाकर लोगों को हैंडवाश करने के तरीके बताए जाएंगे। स्वच्छ पानी पीने के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा।
अलग-अलग विभागों को बांटी गई जिम्मेेदारी
अलग-अलग लोगों को जिम्मेदारियां बांटी गई है। मलेरिया अधिकारी एके मिश्रा ने बताया कि संचारी अभियान के तहत हर विभाग को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। पशुपालन विभाग इन गांवों में सूअर बाड़े हटाने के लिए लोगों से अपील करेगा। कृषि विभाग चूहा और छछुंदर घर में न आए इसके तरीके बताएगा। जल निगम इंडिया मार्का हैंडपंप से पानी पीने का सलाह देगा। इसके अलावा आंगनबाड़ी वर्कर और आशा घर-घर जाकर लोगों को नवकी बीमारी के प्रति जागरूक करेंगी। जिन घरों में 1 से 15 वर्ष तक के बच्चे होंगे, उन घरों पर नवकी बीमारी के जागरूकता को लेकर स्टीकर लगाया जाएगा।
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ये हैं अति संवेदनशील गांव
शोहरतगढ़ के अतरी, कोइरीडाहा, संतोरा, शोहरतगढ़, सीतारामपुर, बढ़नी के रामनगर, इटवा के विशुनपुर खुर्द, कठेलागर्दी, बांसी के हरैया नानकर, भगौतापुर, चेतिया, कोडरी खास, सोनफेरवा बुजुर्ग, मिठवल के बघौली, बहादुरपुर, नचनी, नदांव, अशोगवा, डुमरियागंज के भानपुर रानी, जोगिया के बभनी, करौंदा, मुड़िला, बैरिहवा, देवरा, कटहना, बर्डपुर कलवारी, भगवानपुर, सेमरा, लोटन के नेतवर, रमवापुर, उसका के उसका बाजार, नौगढ़ के कोड़रा ग्रांट, परसा शाह आलम, रमवापुर आदि गांव शामिल हैं।
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