सिद्धार्थनगर जिले में नदियों की रफ्तार धीमी होने के बावजूद चहुंओर तबाही मची हुई है। बूढ़ी राप्ती किनारे के टूटे बांध और राप्ती के बांधों में गैप के सैलाब से कई गांव जलमग्न हैं, पानी चढ़ने से जोगिया-पकड़ी समेत कई मार्ग बंद है। नौगढ़-बस्ती एनएच पर जोगिया चौराहे पर पानी चढ़ गया है। बांसी कस्बा समेत आसपास के बांध बचाने के लिए विभाग सहित स्थानीय लोग जद्दोजहद करते दिख रहे हैं।
राप्ती अब तक सबसे उच्चतम जलस्तर 86.280 पर पहुंचकर स्थिर हो चुकी है, फिर भी बांसी कस्बा समेत आसपास के कई गांवों में तबाही मची हुई है। राप्ती नदी में उफान से किनारे बने बांध में गैप से बाढ़ का पानी बांसी-इटवा मार्ग पर बह रहा है, जिससे आवागमन अवरुद्ध है। बांसी प्रतिनिधि के अनुसार राप्ती नदी में उफान से कस्बा समेत सभी बांध मे रिसाव शुरू हो गया है।
कोई अनहोनी न होने पाए, इसके लिए लोग रतजगा कर बांधों की निगरानी कर रहे हैं। नरकटहा प्रोटेक्शन बांध, बीडी बांध पर रतनसेन इंटर कॉलेज के पास, सहजी, बेलबनवा के पास, नरकटहा सोनखर बांध, बांसी पनघटिया बांध पर शमशान घाट के निकट, जमीदारी बांध पर गरगजवा के पास लोग पूरी रात जागकर लोग बांध की देखभाल कर रहे हैं। साथ ही रिसाव रोकने का प्रयास तट पर बसे लोग तथा जिम्मेदार विभाग के लोग कर रहे हैं। नगर के आसपास के बांधों की रात में नपा अध्यक्ष मो इद्रीश पटवारी, मो हारुन, सभासद सैयद मोहम्मद कुतुब, राधेश्याम भी निगरानी करते रहे। बूढ़ी राप्ती का जलस्तर रविवार को खतरे के निशान से अधिक 87.280 मीटर पर रही, जबकि कूड़ा, घोघी, जमुआर, बानगंगा खतरे के निशान से नीचे बह रही है।
थाने में घुसा पानी, पकड़ी-जोगिया मार्ग बंद
जोगिया। बूढ़ी राप्ती नदी किनारे टूटे बांध से बाढ़ का पानी से नौगढ़-बस्ती एनएच पर तीन सौ मीटर तक सड़क पर डेढ़ फीट से अधिक पानी होने के कारण आवागमन करने में दिक्कत हो रही है। जोगिया कोतवाली परिसर एवं भवन समेत चौराहे के दुकानों एवं घर में जलभराव हो चुका है। बाढ़ से आसपास के कई गांवों में पानी भरा हुआ है, साथ ही जोगिया चौराहे से पकड़ी मार्ग पर एक किमी तक तीन फीट से अधिक पानी बहने से आवागमन पूरी तरह बंद है।
बाढ़ पीड़ितों तक नहीं पहुंच रही नाव
बांसी। तहसील क्षेत्र के मैरुंड गांव तक तीन दिन बाद भी नाव न पहुंचने से बाढ़ पीड़ितो को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। लोगो का कहना है कि नाव न होने से अस्पताल जाने, दवा लाने व खाने-पीने का सामान सहित दैनिक उपयोग का सामान लाने के लिय लोग जान को जोखिम मे डाल रहे हैं। महुआ खुर्द गांव निवासी राजेंद्र दूबे का कहना है की उनका गांव पूरी तरह जलमग्न है, लेकिन नाव अभी तक नहीं मिली है। ग्रामसभा के सिर्फ एक टोला पचहीडीह मे छोटी नाव प्रशासन ने लगाया है जो नाकाफी है। यही हाल कई बाढ़ पीड़ित गांव की है जहां तक नाव नही पहुंची है।