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पुलिस बनी जरूरतमंदों उम्मीद

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बांसी क्षेत्र के देवभरिया गांव में राह सामग्री देते पीआरबी के जवान । - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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पुलिस बनी लोगों की आखिरी उम्मीद
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सब्जी, दाल, आटा के लिए डायल-112 पर लोग कर रहे कॉल
सुरक्षा के साथ-साथ खाद्य सामग्री भी पहुंचा रहे जवान
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। कोरोना वायरस संक्रमण के बचाव के लिए पुलिस लोगों को घरों में रहने की नसीहत ही नहीं दे रही है बल्कि जरूरतमंदों की दूत भी साबित हो रही है। मदद पाने वालों का कहना है कि पुलिस ही आखिरी उम्मीद बन चुकी है क्योंकि लॉकडाउन में कोई जिम्मेदार उनकी ओर रुख नहीं कर रहा। पुलिस को याद करना पड़ रहा है और वह हमारे साथ खड़ी भी हो रही है।
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कोरोना वायरस मरीजों की संख्या के बढ़ने के बाद देश में लॉकडाउन घोषित कर दिया गया। लोगों को घरों में रहने का निर्देश दिया गया है। बहुत ही जरूरत हो तभी घरों से बाहर निकलने की अनुमति है। लॉकडाउन होने के बाद कई परिवार के समक्ष खाने का भी संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में वह पुलिस से मदद की गुहार लगा रहे हैं। ऐसे में पुलिस भी मदद में उनके साथ खड़ी नजर आ रही है। वह सड़क पर ड्यूटी करने के साथ लोगों को तक राहत सामग्री भेजने का भी काम कर रहे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो अब तक डायल-112 व स्थानीय थाने की पुलिस 50 से अधिक ऐसे लोगों तक खाद्य सामग्री पहुंचा चुके हैं, जिनके घरों में खाने का एक दाना भी नहीं था। एक मामला बांसी को कोतवाली क्षेत्र के भिटिया गांव है। यहां एक महिला ने फोन करके बताया कि साहब घर में कोई और कमान वाला नहीं है। दो दिन से कहीं गए नहीं, खाने का सामान नहीं है। बच्चे भूखे हैं। सूचना मिलने के बाद डायल-112 की टीम गांव पहुंची और महिला को आटा, दाल, चावल सहित अन्य सामग्री दिया। वहीं डायल-112 पर 88 ऐसे लोगों ने कॉल किया है कि साहब हमारे गांव में एक व्यक्ति है, उसे बुखार है, जुकाम है, कोरोना से संक्रमित हो सकता है। साथ ही 10 ऐसे भी शिकायत हुई कि साहब दुकानदार अधिक दाम पर तेल, चीनी, दाल व सब्जी बेच रहे हैं। जनता को लूटने का काम कर रहे हैं। साहब मदद करिए। ऐसे में संबंधित थाना और पूर्ति विभाग को जानकारी दी गई। कई मामलों में केस भी दर्ज किया गया। पुलिस दूत बनकर लोगों की मदद करने का काम कर रही है। डायल-112 के प्रभारी आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि डायल-112 में 31 चार पहिया और 17 दो पहिया वाहन चल रहे हैं। 300 से अधिक कर्मी काम में लगे हैं। अगर कोई मदद मांग रहा है तो उसे क्षेत्र के जवान घर पहुंचकर राहत सामग्री दे रहे हैं। वहीं मिलने वाली शिकायत को संबंधित थाने को भेजा जा रहा है। उनके द्वारा भी कार्रवाई की जा रही है।
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