- विधवा पेंशन का ले रही थी लाभ, रिपोर्ट में राशन कार्ड में पति को बताती रही जीवित
- राशन कार्ड और पेंशन में आधार कार्ड के जरिये ई-केवाईसी में पकड़ी गई गड़बड़ी
-किसी की 4 साल पहले तो किसी की 6 साल 8 साल पहले हो चुकी है मौत
सिद्धार्थनगर। लालच और कितना हासिल कर लें, इसके लिए लोग किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। उन्हें न तो सिस्टम का डर और ना बदनामी का। लाभ के लिए रिश्ते तक को दांव पर लगाने से नहीं चूक रहे हैं। रिश्ते को दांव पर लगाने का एक मामला पूर्ति विभाग में सामने आया है। इसमें करीब छह हजार ऐसी महिलाएं हैं जो विधवा होने को पेंशन ले ही रही हैं लेकिन, राशन के लिए बाकायदा रिपोर्ट में पति को जीवित और खुद को सुहागिन बनाकर वहां लाभ लेने से भी नहीं चूक रही हैं।
जांच में यह पाया गया है कि इनकी मौत भी साल छह माह नहीं, बल्कि चार से आठ से पहले हो चुकी है। इसके बाद भी बीच-बीच में होने वाले सर्वे में वे खुद को सुहागन और पति को जीवित होने के बार में जानकारी भी देती आ रही हैं। मामला तब पकड़ में आया, जब आधार से पेंशन और राशन के लिए ई- केवाईसी हुई तो रिपोर्ट में सच्चाई बाहर आ गई। इसमें एक दो नहीं बल्कि जनपद में छह हजार से अधिक मामले पकड़ में आए, जिनका घर- घर जाकर सर्वे किया गया। इसके बाद इन्हें राशन कार्ड की लिस्ट से बाहर कर दिया गया है। सरकार के दिशा- निर्देश के अनुसार अभी सर्च चल ही रहा है और गड़बड़ी करने वाले जद में आ सकते हैं।
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वितरण प्रणाली में सख्ती से कालाबाजारी पर शिकंजा
खाद्यान वितरण में होने वाली कालाबाजारी और गड़बड़ी को रोकने के लिए सरकार नियम में लगातार बदलाव कर रही है। डिजिटल व्यवस्था को लागू करके सेंधमारी पर शिकंजा कस रही है। इसमें वितरण प्रणाली में कई बदलाव किया है। मृतक और अपात्रों का भी राशन लोग उठा रहे थे। इन्हें बाहर करने और पात्रों को जोड़ने के लिए राशन कार्ड के हर यूनिट को आधार और वितरण करने वाली मशीन से जोड़ दिया गया है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद बड़ी संख्या में राशन कार्ड कट गए जो अपात्र थे। इसके बाद सही और पात्र व्यक्ति को ही राशन मिले। इसके लिए हर कार्ड के हर यूनिट की ई-केवाईसी को अनिवार्य कर दिया गया है। ई-केवाईसी से एक से दो राशन कार्ड और मृत व्यक्ति की तस्दीक करके उन्हें हटाया जा रहा है। इसमें बड़े पैमाने पर अपात्र बाहर हो रहे हैं। अभी बिना ई-केवाईसी वाले दो लाख यूनिट पर कटने का ग्रहण है। जल्द ही वह बाहर हो जाएंगे।
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ई- केवाईसी में पकड़ में आया मामला
पात्र व्यक्ति को ही राशन मिले और अपात्र को बाहर करके नए पात्र लोगों को राशन कार्ड से जोड़ने के लिए सरकार ने ई-केवाईसी व्यवस्था लागू कर दिया। इसमें हर यूनिट की ई-केवाईसी अनिवार्य कर दिया गया। आधार के जरिये राशन कार्ड की यूनिट को लिंक किया जा रहा है। इसमें समाज कल्याण विभाग की ओर से विधवा और जिला प्रोबेशन विभाग की ओर से जिन्हें वृद्धा पेंशन दी जा रही है। जीवित को मृतक बताकर नाम काट देने और मृतकों के नाम से पेंशन जारी किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आती हैं। इसे देखते हुए पेंशन धारकों की आधार के जरिये ई-केवाईसी शुरू कर दी गई है। पूर्ति विभाग को ई-केवाईसी के बाद ऐसी महिलाएं मिली हैं, जिनके पति जीवित हैं। फिर भी वह विधवा पेंशन का लाभ ले रही हैं। इसके बाद सर्वे हुआ तो पता चला कि किसी के पति की चार साल तो किसी के छह और आठ साल पहले मौत हो चुकी है। लेकिन, उनके नाम का राशन कार्ड के सत्यापन के दौरान नहीं हटवाए गए और जांच हुई तो महिलाएं पति को जीवित बताती रहीं। पेंशन में विधवा और राशन कार्ड में सुहागिन बनी रहीं।
छह हजार मामले पकड़े गए
डिजिटल जांच में एक दो नहीं, बल्कि छह हजार से अधिक मामले पकड़े में आए। इसमें मृतकों का नाम बाहर किया गया और कार्ड के फार्म में विधवा दर्शाया गया, जिससे आगे इस प्रकार से गड़बड़ी न कर सकें। दो ब्लॉकों में जानकारी ली गई तो पता चला कि बांसी ब्लॉक क्षेत्र में 187 और मिठवल में 323 ऐसी महिलाएं मिली।
पूर्ति निरीक्षक अर्चना सिंह ने बताया कि डोर टू डोर जांच में पाया गया। इसके बाद नाम हटाने के लिए ब्लॉकों में भी इसी प्रकार से किया गया है।
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यह भी दायरे में, राशन कार्ड से किए जा रहे वंचित
राशन कार्ड को लेकर केंद्र सरकार की ओर से नए-नए नियम लागू किए जा रहे हैं। इसमें इस बार चार पहिया वाहन जो अधिक कीमत के हैं, इसमें प्रकार के हिसाब से मानक तय किया गया है। उसके तहत दायरे में आने वालों कार्ड निरस्त किए जा रहे हैं। इसमें जिले में 534 मामले सामने आए थे, जिसमें 173 का कार्ड निरस्त किया जा चुका है। अन्य की जांच करके काटा जा रहा है। इनकम टैक्स की सीमा निर्धारित की गई है। तय मानक से बाहर वालों का कार्ड निरस्त हो रहा है। इसमें 1652 लोग दायरे में आए हैं। अब तक 153 का निरस्त हुआ है। इसके अलावा पांच एकड़ से अधिक जोत वालों को चिह्नित करके कार्ड निरस्त करने के निर्देश हुआ है।
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जिले में हैं इतने कार्डधारक
पूर्ति विभाग से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक पात्र गृहस्थी के 3,95,162 संख्या है और 16,63,396 यूनिट है। वहीं अंत्योदय 82,497 कार्ड हैं। जबकि इसमें 2,40,234 लाभार्थी हैं। जबकि, शहर से लेकर 1300 से अधिक कोटे की दुकान है, जहां से राशन का वितरण होता है।
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बोले जिम्मेदार
बिना ई- केवाईसी वार्ड राशन कार्ड धारकों को शासन स्तर से ही बाहर किया जाएगा। जांच में छह हजार से अधिक ऐसे राशन कार्ड पाए गए, जिनमें महिला विधवा पेंशन पा रही है, लेकिन राशन कार्ड में पति को मृतक नहीं बताया गया है। जांच में भी उसे छिपाया गया। ई- केवाईसी में मामला पकड़ में आया। इसके बाद कई स्तर पर जांच की गई। फिर ऐसे लोगों का नाम राशन कार्ड की यूनिट से निरस्त किया गया। इसमें कई प्रकार की जांच हो रही है। अपात्र और बिना ई- केवाईसी वाले जल्द ही बाहर जाएंगे।
- कुवंर देवेंद्र प्रताप सिंह, डीएसओ