- नगर में बदली जाएगी 20 साल पुरानी सात टंकियाें से जुड़ी वाॅटर सप्लाई की पाइपलाइन
- एक तरफ से शुरू हुआ काम, इंदौर की घटना को देखते हुए सभी मोहल्ले की पुराने पाइपों को बदले जाने की शुरू हो रही प्रकिया
- 80 करोड़ के प्रोजेक्ट में पहले चरण में पाइप बदलने का होगा काम, प्रथम चरण में तीन मोहल्ले से शुरुआत
सिद्धार्थनगर। इंदौर में प्रदूषित पानी के सेवन से हुई मौतों के बाद बदहाल पेयजल व्यवस्था की जांच कर इसे दुरुस्त कराया जा रहा है। वहीं, ऐसे ठोस कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे लोगों को स्वच्छ पानी मिल सके और बीमारी का खतरा दूर हो। इस कड़ी में नगर में 80 करोड़ रुपये से नए वॉटर टैंक बनाने और पुरानी पेयजल योजनाओं में आई खामियों को दूर करने के लिए तीन मोहल्लों में प्रक्रिया शुरू की गई। योजना के तहत 15-20 साल पुराने पाइप से आने वाले मटमैला पानी और लीकेज को दूर करने के लिए सभी सात पुरानी पानी की टंकियों से जुड़ी पाइपलाइन को बदले जाने की रणनीति तैयार कर ली गई है। पहले चरण में सभी पाइपलाइन को बदला जाएगा। नगर के लोगों का कहना है कि इससे बड़ी राहत मिलेगी।
नगर के सीमा विस्तार के साथ दायरा और आबादी बढ़ गई है। इसके बाद पाइपलाइन परियाेजना से अछूती आबादी, अतिरिक्त भार और पानी की किल्लत से जूझ रहे मोहल्लों में आबादी के साथ अतिरिक्त ओवरहेड टैंक बनाने की योजना बनी। इसमें पुरानी पेयजल परियोजनाओं के पाइप बदलने के साथ अन्य खामियों को दूर करना भी शामिल था। शासन स्तर से 80 कराेड़ रुपये में नई पेयजल परियोजना और पाइपलाइन बदलने की स्वीकृति के साथ बजट भी आवंटन शुरू हो गया है। इसमें पहले चरण में तीन मोहल्लों में पहले चरण में पाइप बदलने का काम शुरू हो गया है। इंदौर की घटना के बाद रणनीति तैयार की गई कि सभी पुरानी टंकियों के पाइप जहां बदलने की जरूरत है, सभी को प्राथमिकता के आधार पर बदला जाएगा। इस कार्य होने से नगर की सवा लाख से अधिक आबादी की पेयजन की समस्या दूर होगी।
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इसलिए बदलाव होना जरूरी
नगर में पूर्व की तुलना में आबादी तेजी से बढ़ी, लेकिन जलापूर्ति व्यवस्था पुरानी थी। ऐसे में जब पानी की मांग बढ़ती खास करके गर्मी में दबाव में मोटर जलने के साथ कई बार पाइप फटने के मामले सामने आने लगे। पानी की मांग और आपूर्ति के दबाव में जगह-जगह पाइप टूटने से कई दिनों तक जलापूर्ति ठप रहने की समस्या भी सामने आने लगी। इससे बड़ी आबादी पानी के लिए परेशान थी। इसमें गांधीनगर, कृष्णा नगर, पूरब पड़ाव और इंद्रा नगर मोहल्लों में करीब दो दशक पहले डाले गए पाइप पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। बारिश के समय और गर्मी में जलापूर्ति का दबाव बढ़ते ही जगह-जगह पाइप फट जाते हैं, जिससे पानी की सप्लाई घंटों नहीं बल्कि कई बार दिन तक ठप हो जाती है। इसका सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ता है। मजबूरी में लोगों को जार और टैंकर पर निर्भर होना पड़ता था, जिससे अतिरिक्त खर्च भी बढ़ गया था। चार वार्डों में एक साथ काम शुरू कर दिया गया है। अब गांधीनगर, ऑफिसर्स कॉलोनी, पुलिस लाइंस, सिसहया, भगतसिंह, परसा महापात्र, पिपरा पांडेय और रेहरा की टंकियों से जलापूर्ति हो रही है। इसमें सभी 10-25 साल के भीतर की हैं। जहां पाइपलाइन जर्जर हैं, वहां इसे पूरा बदल दिया जाएगा। इसके साथ ही अन्य खामियों को दूर कर दिया जाएगा।
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बोले लोग
पिछले कई साल से पानी की बड़ी दिक्कत थी। गर्मी आते ही सप्लाई बंद हो जाती थी। अब पाइप बदल रही है तो उम्मीद है कि पानी की समस्या खत्म होगी।
रामसेवन गुप्ता, पं. दीनदयाल नगर
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लीकेज के कारण गंदा पानी आने की शिकायत रहती थी। नई पाइपलाइन से साफ पानी मिलेगा, इससे बड़ी राहत मिलेगी। यह काम पहले होना चाहिए था।
धमेंद्र लोधी, हनुमंत नगर रेहरा
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बोले जिम्मेदार
नगर में पेयजल व्यवस्था बेहतर की जा रही है। इसमें नई पेयजल परियोजनाएं शुरू कराई जा रही हैं। इसके साथ ही पुरानी पेयजल परियोजनाओं की खामियों को सही करवाया जा रहा है। पुराने पाइप को बदलकर नया किया जाएगा। इसके लिए काम शुरू हो गया है।
- अजय कुमार सिंह, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका सिद्धार्थनगर