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Siddharthnagar News: गंदगी से होकर घरों तक पहुंच रहा दूषित पेयजल...तेजी से बढ़ रहा परजीवी संक्रमण

Sat, 10 Jan 2026 11:35 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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शहर के गांधीनगर में ​स्थित वाटर टैंक के नीचे फैली हुई गंदगी। संवाद - फोटो : स्केटिंग यात्रा से लौटी वंशिका को उपहार देते पालिकाध्यक्षा प्रतिनिधि राजीव गुप्ता। स्रोत संवाद
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- नालियों से घरों तक पहुंच रही बीमारी, दूषित पानी ने बढ़ाई मुसीबत
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- मेडिकल कॉलेज समेत अस्पतालों में पेट संबंधी मरीजों की बढ़ी तादाद
सिद्धार्थनगर। जिले में दूषित पेयजल लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। हैंडपंप और सबमर्सिबल के आसपास जलभराव, गंदी नालियों के बीच से गुजरती पाइपलाइनों के कारण घरों तक पहुंच रहा पानी लोगों को बीमार कर रहा है। इसका नतीजा यह है कि जिले के अस्पतालों में पेट संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
जमीनी पड़ताल में पाया गया कि जिले के कई इलाकों में हैंडपंप और नल से आने वाले पानी में बदबू, मटमैला रंग और स्वाद बदलने की शिकायत आम है। मजबूरी में लोग यही पानी पी रहे हैं। इस मजबूरी की सबसे बड़ी कीमत सेहत चुका रही है। इधर, जिला अस्पताल और निजी लैब की जांच रिपोर्टों में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पेट दर्द, दस्त, कमजोरी और भूख न लगने की शिकायत लेकर आने वाले बड़ी संख्या में मरीजों में आंतों के परजीवी पाए जा रहे हैं। विशेषज्ञ इसे पानी के जरिए फैलने वाला परजीवी संक्रमण बता रहे हैं।
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स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि यह महज इलाज का नहीं, रोकथाम का मुद्दा है। दूषित पानी से बार-बार संक्रमण होता है, जिससे शरीर पोषक तत्व नहीं ले पाता। नतीजा, बच्चों में सीखने की क्षमता घटती है, युवाओं की कार्यक्षमता कम होती है और महिलाओं में एनीमिया बढ़ता है। विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि सुरक्षित पानी सबसे सस्ती और सबसे असरदार दवा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक बीते कुछ महीनों से यह ट्रेंड लगातार बना हुआ है। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों, महिलाओं और मेहनतकश युवाओं पर देखने को मिल रहा है। चिकित्सकों ने लोगों से उबला या शुद्ध पानी पीने, खुले में रखे भोजन से बचने और पेट संबंधी लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराने की अपील की है।

यह है परजीवी संक्रमण
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. नम्रता बताती हैं कि बच्चों में वजन न बढ़ना, चिड़चिड़ापन और पढ़ाई में ध्यान न लगना इन सबके पीछे परजीवी संक्रमण एक बड़ा कारण बन रहा है। महिलाओं में खून की कमी (एनीमिया) और लगातार थकान के मामले भी इसी से जुड़े पाए जा रहे हैं।

डॉक्टर बताते हैं कि परजीवी शरीर में रहकर खून और पोषक तत्वों को खा जाते हैं। मरीज बाहर से सामान्य दिख सकता है, लेकिन अंदर ही अंदर उसकी इम्युनिटी कमजोर होती जाती है। यही वजह है कि लोग महीनों तक गैस, एसिडिटी या सामान्य कमजोरी समझकर दवा लेते रहते हैं और असली बीमारी पकड़ में देर से आती है।
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हर 10 में चार मरीज संक्रमण के



जिला अस्पताल और निजी पैथोलॉजी लैब की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पेट से जुड़ी शिकायतों के साथ जांच कराने वाले हर 10 में से करीब चार मरीजों में परजीवी संक्रमण की पुष्टि हो रही है। इनमें सबसे आम संक्रमण अमीबा और जिआर्डिया के हैं, जो सीधे दूषित पानी से जुड़े हैं।

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परजीवी संक्रमण के पीछे स्थानीय कारण

- हैंडपंप और सबमर्सिबल के पास जलभराव



- नालियों और पेयजल पाइपलाइन का पास-पास होना

- खुले में शौच की समस्या पूरी तरह खत्म न होना



- कच्ची सब्जियों की बिना सही सफाई के सप्लाई

- बच्चों का गंदे फर्श और मिट्टी से लगातार संपर्क



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कौन से परजीवी, क्या असर

- अमीबा : पेचिश, पेट दर्द, लिवर फोड़ा
- जिआर्डिया : लंबे समय तक दस्त, वजन गिरना

- राउंडवर्म : कुपोषण, आंतों में रुकावट
- हुकवर्म : खून की कमी, कमजोरी
- टेपवर्म : पोषक तत्वों की भारी कमी

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जांच और इलाज
- स्टूल टेस्ट से परजीवी की पहचान
- जरूरत पर ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड

- परजीवी के प्रकार के अनुसार एंटी-पैरासाइट दवा
- बच्चों के लिए सरकारी स्तर पर डी-वॉर्मिंग अभियान


बचाव का सीधा फार्मूला

- उबला या फिल्टर किया पानी

- खाने से पहले और शौच के बाद हाथ साबुन से धोना- सब्जियों को नमक/पोटाश के पानी से धोना
- बच्चों को समय पर डी-वॉर्मिंग

- पेट की परेशानी 3 दिन से ज्यादा रहे तो जांच
(सभी सुझाव विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. जीएम शुक्ल के अनुसार)
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