- डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के बनगाई नानकार में श्रीमद्भागवत कथा का चौथा दिन
औराताल। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के बनगाई नानकार में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथावाचक बृजेश शुक्ल ने भगवान विष्णु की लीलाओं का वर्णन किया। जड़भरत और वामन अवतार के प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
कथावाचक ने जड़भरत की कथा सुनाते हुए बताया कि राजा भरत को हिरण के बच्चे से मोह हो गया था। इसी आसक्ति के कारण उन्हें अगले जन्म में हिरण बनना पड़ा। तीसरे जन्म में वह जड़भरत के रूप में प्रकट हुए। ज्ञानी होने के बावजूद उन्होंने स्वयं को सांसारिक मोह-माया से दूर रखा और ईश्वर भक्ति का मार्ग अपनाया। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि सांसारिक मोह परमात्मा की प्राप्ति में बाधक बन सकता है।
इसके बाद भगवान विष्णु के वामन अवतार की कथा सुनाई गई। कथावाचक ने बताया कि दैत्यराज बलि के अहंकार को दूर करने और धर्म की स्थापना के लिए भगवान विष्णु ने ऋषि कश्यप और माता अदिति के घर वामन रूप में अवतार लिया था। 52 अंगुल के इस छोटे स्वरूप में भगवान ने राजा बलि से तीन पग भूमि दान में मांगी। संकल्प पूरा होने पर उन्होंने विराट रूप धारण कर दो पग में पूरी सृष्टि और लोक नाप लिए। तीसरे पग के लिए स्थान न बचने पर राजा बलि ने अपना मस्तक भगवान के चरणों में समर्पित कर दिया।
कथावाचक ने कहा कि अहंकार त्यागकर प्रभु के चरणों में समर्पण करने वाले भक्त पर सदैव ईश्वर की कृपा बनी रहती है। कथा में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।