सिद्धार्थनगर/खुनुवां। नेपाल को हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने के बाद बर्फ, चट्टान और मलबे के साथ आई तेज बाढ़ सबसे अधिक असर नेपाल के रसुवा जिले और त्रिशूली नदी घाटी के आसपास के क्षेत्रों में पड़ा।
नेपाल प्रशासन और सेना आपदा से निपटने लगी हैं बल्कि जो जनप्रतिनिधि हैं, वह भी अपने स्तर से जानकारी ले रहे हैं। हर संभव मदद और फिर उठ खड़ा होने बात कर रहे हैं। आइए आपदा के प्रति किस तरह दर्द बयां कर रहे हैं सरकार के मंत्री और नेता।
आपदा ने नेपाल को दिया बड़ा दर्द और नुकसान : तुलियापुर। सुधाकर पांडेय विधायक कपिलवस्तु क्षेत्र संख्या तीन ने कहा कि प्रकार की त्रासदी कभी नहीं आई थी। आज भी एक हिमपात हुआ है। सरकार रेस्क्यू ऑपरेशन कर रही है। हमलोग वहां के जनप्रतिनिधियों से संपर्क में हैं। पल-पल के बारे में जानकारी ली जा रही है। आपदा से पूरा देश आहत है। रजत प्रताप शाही, मेयर कृष्णानगर नगरपालिका ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण यह घटना हुई है। सैकड़ों विदेशी पर्यटक फंसे हुए हैं। सरकार उन्हें व अपने नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का प्रयास कर रही है।
नेपाल का बहुत नुकसान हुआ है, कई पुल व सड़कें बाढ़ में बह गई हैं। पहाड़ से अचानक बड़ी मात्रा में बर्फ, चट्टान, मिट्टी और मलबा नदी में गिरने के कारण जलप्रवाह में असामान्य तेजी आई, जिससे बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई।