- ककरहवा बॉर्डर पर सड़क पर अतिक्रमण से लग रहा था जाम
ककरहवा। नेपाल सीमा से सटे ककरहवा बॉर्डर पर सोमवार को प्रशासन ने अवैध रूप से किए गए अतिक्रमण को जेसीबी से पूरी तरह ढहा दिया। इससे अब बॉर्डर पर सड़क चौड़ी हो गई है। प्रशासन के इस कार्रवाई से लोगों ने खुशी व्यक्त की है। लोगों का कहना है कि अतिक्रमण से सड़क संकरी हो गई थी, जिससे बॉर्डर पर जाम लग जाता था। सीमा पार जाने वालों को घंटों जाम में फंस कर इंतजार करना पड़ता था। लेकिन अब सड़क चौड़ी हो जाने और स्वागत द्वार बन जाने से जाम की स्थिति खत्म हो जाएगी। अंतरराष्ट्रीय मानचित्र में दर्ज जिले का अति महत्वपूर्ण ककरहवा बॉर्डर पर शासन की ओर से पर्यटकों के स्वागत के लिए स्वागत द्वार का निर्माण किया जा रहा है। निर्माणाधीन स्वागत द्वार में अवरोध बन रहे अवैध अतिक्रमण को प्रशासन ने जेसीबी लगा कर सोमवार को हटा दिया है। अतिक्रमण हट जाने से सीमा पर आए दिन लग रहे जाम की समस्या से मुक्ति मिलेगी तथा बॉर्डर की रौनक भी बढ़ेगी।
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बोले कस्बे के लोग
नेपाल सीमा पर स्थित ककरहवा बॉर्डर जिले का महत्वपूर्ण बॉर्डर है। यहां से भगवान बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी मात्र नौ किमी की दूरी पर स्थित है। इस बॉर्डर के रास्ते देश के कोने-कोने से पर्यटक भगवान बुद्ध का दर्शन करने लुंबिनी आते-जाते है। सीमा पर स्वागत द्वार बनने से पर्यटकों का आकर्षण बढ़ेगा और ककरहवा बॉर्डर से आने जाने वाले लोगों की संख्या में बढ़ोतरी होगी।
- बुद्धेश जायसवाल, समाजसेवी
भारत और नेपाल के बीच सदियों से गहरा रिश्ता रहा है। दोनों देशों के हजारों लोग ककरहवा बॉर्डर से प्रतिदिन रोजमर्रा का सामान लेकर आते-जाते हैं। सड़क चौड़ीकरण और स्वागत द्वार बनने से रोजगार में वृद्धि होगी। जाम की समस्या से छुटकारा भी मिलेगा।
- वीरेंद्र मोदनवाल व्यापारी
बिजनौर में गंगा बैराज के तटबंध का कटान को रोकने तारों का जाल लगाते ग्रामीण। संवाद