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Siddharthnagar News: कफ सिरप व दर्द निवारक गोलियाें से चमक रही तस्करी की ‘सेहत’

Sun, 07 Dec 2025 12:25 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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भारत नेपाल सीमा खुनुवा बॉर्डर। - फोटो : सांकेतिक
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सिद्धार्थनगर। नेपाल बॉर्डर पर प्रतिबंधित कफ सिरप, नींद की दवा और तेज दर्द निवारक गोलियों की तस्करी ने ऐसा जाल बिछाया है कि हर महीने तस्कर पकड़े जा रहे हैं, फिर भी सप्लाई पर ब्रेक नहीं लग पा रहा है।
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सीमावर्ती इलाकों में मेडिकल स्टोर की संख्या हर साल 10 प्रतिशत बढ़ रही है जो कहीं न कहीं नेटवर्क के सक्रिय होने की ओर इशारा कर रहा है। मुख्यालय की गोपनीय टीम की जांच में मिले इनपुट से यह साफ है कि यह सिर्फ चोरी-छुपे दवा लाने का खेल नहीं है बल्कि एक संगठित गिरोह इसपर काम कर रहा है। माफिया हैं जो पत्ता से निकलने वाली दवा की कीमत गोली में कई गुना तक वसूल रहे हैं। बॉर्डर पर लगातार जांच हो तो कफ सिरप जैसे बड़े नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
जिले से लगने वाली नेपाल की 68 किलोमीटर सीमा खुली हुई है। बिना रोक-टोक लोगों की आवाजाही होती है। मुख्य बॉर्डर पर सघन जांच भी की जाती है, लेकिन खुले बॉर्डर पर एजेंसियों की निगरानी रहती है और पुलिस भी जांच करती है। इसके बाद भी तस्करों का नेटवर्क यहां भी रहता है, जैसे मौका पाते हैं आभूषण से लेकर खाद्यान्न और अन्य सामान बॉर्डर पार करते हैं।
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राजस्थान और मध्य प्रदेश से कफ सिरप में गड़बड़ी और प्रबंध व तस्करी का नेटवर्क शुरू हुआ तो उत्तर प्रदेश बड़ा केंद्र बना। मुख्यालय अस्थिर की एजेंसियों की जांच में बांग्लादेश और नेपाल में सप्लाई की बात बार-बार सामने आ रही है। इसमें कई एजेंसी कम कर रही है। इसके अलावा ड्रग विभाग भी लगा हुआ है।
सीमावर्ती इलाके में बात करें तो केवल कफ सिरप ही नहीं बड़े पैमाने पर प्रतिबंधित नींद की दवा, दर्द निवारक दवाओं की तस्करी की जा रही है। हर माह थाना और एजेंसी के हाथ लगने वाली दवाएं इसकी पुष्टि भी करती हैं।
बढ़नी बॉर्डर इलाके में रहने वाले मोहम्मद रईस बताते हैं कि सीमावर्ती इलाके में दूर-दूर गांव है। इसके बाद भी हर साल 10 प्रतिशत नए मेडिकल स्टोर खुल रहे हैं।
यही नहीं मेडिकल स्टोर संचालक कब करोड़पति बन गए, इसके बारे में किसी को कानोकान खबर तक नहीं हुई। उनका कहना है कि इनका असली धंधा दवाओं को मंगाकर नेपाल भेजने का है। इसमें उन्हें मोटी कमाई होती है। भारत से जाने वाली और चीन से लीगल रूप से आने वाली दावों पर टैक्स लगता है।
यही कारण है कि तस्करी के जरिये दवाएं जाती हैं। कई बार तो नींद की गोली लेने वाले युवा बॉर्डर की दुकानों पर आकर दवाएं लेते हैं।
इसके अलावा कई माध्यम से तस्करी के जरिये दवाएं बॉर्डर के पार भी पहुंचाई जा रहीं हैं। सीमावर्ती इलाके में बड़ा नेटवर्क दावों पर निर्भर है।
जांच हो तो बड़ा खुलासा हो सकता है, लेकिन पुलिस केवल नींद की दवा पकड़ने तक सीमित रहती है। एजेंसी से जुड़े सूत्र का कहना है कि जांच में सामने आया कि तस्करी तीन लेयर में चलती है।
पहला नेपाल की दुकानों से पत्ता (स्लिप) पर निकलने वाली वैध दवा की अधिक मात्रा, दूसरा बॉर्डर पार करने के लिए बने अस्थाई होटल, खोखे, ई-रिक्शा, बाइक और फेरी वाले और तीसरा भारतीय बाजार में गली-मोहल्लों तक फैला अवैध बिक्री का जरिया।
एजेंसियों को पता चला है कि दवा के असली प्लानर नेपाल के होलसेलर और भारतीय स्टॉकिस्ट को जोड़कर एक चेन बनाई गई है। कई जगह मेडिकल स्टोर सिर्फ ‘कवर’ की तरह चल रहा है, असली कमाई प्रतिबंधित दवा की सप्लाई से की जा रही है।
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