- शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र के तीन गांवों में अंग्रेजों के नाम मिली थी भूमि, मांगे गए थे दावे
- बीते नौ माह में जिले के पांचों तहसीलों में खाली हुई 700 बीघा से अधिक भूमि हुई सरकारी
सिद्धार्थनगर। शोहरतगढ़ तहसील के ग्राम बजहा, जमुहवा और चकईजोत के राजस्व अभिलेखों में अंग्रेजों के नाम दर्ज मिली भूमि का कोई दावेदार सामने नहीं आया। अब भूमि सरकारी खाते में जानी तय है। अभिलेखों में दर्ज अंग्रेजों और उनके उत्तराधिकारियों को नोटिस जारी कर 29 सितंबर तक अपना पक्ष रखने का समय दिया गया था। निर्धारित अवधि में किसी की तरफ से कोई दावा अथवा आपत्ति प्रस्तुत नहीं होने पर डीएम डॉ. राजागणपति आर ने यह संपत्ति राज्य सरकार में निहित करने के लिए शासन को पत्र भेज दिया है। जिला प्रशासन की तरफ से बीते नौ माह में अंग्रेजों और पाकिस्तान चले गए लोगों के नाम दर्ज भूमि समेत फर्जी तरीके से नाम कराई गई सात सौ बीघा से अधिक भूमि खाली कराई गई है।
शोहरतगढ़ तहसील के ग्राम चकईजोत टोला अहिरौला निवासी रामगोपाल ने शिकायती पत्र देकर अंग्रेजों के नाम गांव में दर्ज भूमि को खाली कराने की मांग की थी। डीएम के निर्देश पर एसडीएम और तहसीलदार शोहरतगढ़ ने जांच कर रिपोर्ट सौंपी। इसमें बताया था कि शोहरतगढ़ तहसील के इन गांवों के विभिन्न गाटों में कई जमीन अब भी अंग्रेजों के नाम दर्ज है, जिनमें राजस्व ग्राम बजहा के एक गाटा में मिस डोरा एथेल, मिवेन बिलकीस, मिसेज डयना फोर, अलेकजेंडर गिवेन, मिस एम्टप जोजे, हसबैंड एडववकर का नाम दर्ज है। ग्राम जमुहवा के एक गाटा में मिसेज एडन फोसिर्स, एटकनवाकर जोजे हैसलेन, वोमिस एंस एथेल मिबन, दूसरे गाटा में मिसेल एथल इनली गिवन आदि व तीसरे गाटा में मिसेज गिलयेन पीपी आदि का नाम दर्ज है। इसी तरह ग्राम चकईजोत के एक गाटा में अलेकजेंडर गिवेन, मिसेज एथेल यमनी व मिसेज बिलियम चालिस का नाम दर्ज है।
जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद डीएम ने उक्त भूमि को समस्त भारों से मुक्त कर राज्य सरकार में निहित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। इसके तहत निर्धारित तिथि 29 सितंबर तक संबंधित खातेदारों को जिलाधिकारी न्यायालय में स्वयं अथवा अधिवक्ता के माध्यम से अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस दिया गया था। नोटिस में बताया गया था कि संबंधित लोग उपस्थित होकर अपना पक्ष नहीं रखेंगे तो यह समझा जाएगा कि उनको कुछ नहीं कहना है। इसके बाद उक्त भूमि को परित्यक्त घोषित करते हुए राज्य सरकार के स्वामित्व में निहित करने के लिए एकपक्षीय आदेश पारित कर दिया जाएगा। इसी के तहत डीएम ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
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जिला प्रशासन ने तैयार किया लैंड बैंक, हो रहे विकास कार्य
जिला प्रशासन की तरफ से बीते नौ माह में अभियान चलाकर जिले के पांचों तहसीलों में सात सौ बीघा से अधिक भूमि खाली करा लैंड बैंक तैयार किया है। इसमें अंग्रेजों और पाकिस्तान चले गए लोगों के नाम रही भूमि को नियमानुसार सरकारी खाते में दर्ज में कराने का काम हुआ। वहीं फर्जीवाड़ा कर राजस्व अभिलेखों में चढ़ाए गए नाम को खारिज कर सरकारी भूमि भी घोषित कराया गया है। इसी तरह के एक मामले में फर्जीवाड़ा कर अपने नाम दर्ज कराए गए। शहर के पकड़ी से जोगिया मार्ग किनारे 12 बीघा बेशकीमती भूमि को खाली कराया गया। इस भूमि पर डीएम डॉ. राजागणपति आर ने काला नमक चावल के लिए कामन फैसिलिटी सेंटर निर्माण के लिए आवंटित कर दिया है।
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अंग्रेजों व पाकिस्तान गए लोगों के नाम दर्ज थी 400 बीघा भूमि
आजादी के 77 वर्ष बाद भी अब तक जिले के पांचों तहसील क्षेत्र के कई राजस्व ग्रामों के अभिलेखों में अंग्रेजों और पाकिस्तान चले गए लोगों के नाम दर्ज 400 बीघा से अधिक भूमि मिल चुकी है। इसे सरकारी घोषित कराया जा चुका है। शोहरतगढ़ से पहले नौगढ़ तहसील के बर्डपुर क्षेत्र के 14 राजस्व गांवों में अंग्रेजों के नाम दर्ज 5.104 हेक्टेयर भूमि (41 बीघा) राजस्व अभिलेखों में सरकारी भूमि के तौर पर दर्ज हुई है। इनमें ग्राम बर्डपुर नंबर एक, दो, पांच, छह, सात, आठ, नौ, 10, 12, 13 व 14 समेत दुल्हा सुमाली, दुल्हा दरमियानी और दुल्हा खुर्द शामिल थे। वहीं आठ माह पहले इटवा तहसील के लमुईया गांव में भारत विभाजन के समय पाकिस्तान चले गए चार लोगों के नाम दर्ज 230 बीघा मिली थी जबकि संतकबीरनगर जिले के मेंहदावल के ग्राम सिकरी निवासी पाकिस्तान चले गए व्यक्ति के नाम से बांसी तहसील के बेलवा लगुनही व साहू खिरिया गांव में 64 बीघा और इटवा तहसील के ग्राम परसोहिया तिवारी में पाकिस्तानी नागरिक की 48 बीघा भूमि मिल चुकी है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजकर संबंधित भूमि सरकार के खाते में दर्ज कराई गई।
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फर्जीवाड़ा कर दर्ज करा ली गई थी 300 बीघा सरकारी भूमि
राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी कर जिले के बांसी, नौगढ़ और शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र में 300 बीघा से अधिक भूमि को खाली करा सरकारी घोषित कराया गया है। इसमें बांसी तहसील तहसील क्षेत्र के ग्राम चवरताल का है, जहां पर फर्जी अभिलेख प्रस्तुत कर 90 बीघा से अधिक सरकारी भूमि पर खतौनी में नाम दर्ज कराया गया था। यह नवीन परती के कई गाटों की भूमि थी, जिसे खाली करा सरकारी घोषित किया गया और मामले में केस भी दर्ज हुआ है। बांसी तहसील के ही बेलौहा बाजार में भी फर्जीवाड़ा अपने नाम दर्ज कराई गई। बेशकीमती सरकारी भूमि खाली कराई गई। वहीं नौगढ़ तहसील के लोटन क्षेत्र के ग्राम बेलौहा में तालाब, नाला व झाड़ी की 64 बीघा सरकारी भूमि को राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी कर 24 लोगों के नाम चढ़ा दिया गया था, जिसे सरकारी घोषित कराया गया। इसी तहसील के ही पकड़ी जोगिया राज्य मार्ग पर ग्राम महदेवा तिवारी में सड़क किनारे स्थित तीन गाटों की बेशकीमती 12 बीघा सरकारी भूमि को फर्जीवाड़ा कर तीन लोगों के नाम दर्ज करा लिया गया था, जिसे खाली करा सरकारी घोषित कराया गया। इसी तरह इटवा तहसील के कोटखास गांव में 45 बीघा सरकारी भूमि खाली कराई गई। साथ ही शोहरतगढ़ तहसील में भी 100 बीघा सरकारी भूमि खाली कराई गई।
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जिले के विभिन्न राजस्व ग्रामों में अंग्रेजों व पाकिस्तान चले गए लोगों के नाम दर्ज भूमि के संबंध में विधिक प्रक्रिया के तहत इन संपत्तियों को राज्य सरकार में निहित करने की कार्रवाई की गई है। साथ ही विभिन्न राजस्व ग्रामों में स्थित सरकारी भूमि को फर्जीवाड़ा कर नाम चढ़ाने के मामले में कार्रवाई करते हुए खाली कराया गया। खाली कराई गई सरकारी भूमि पर शासन के निर्देशानुसार विभिन्न विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए आवंटित किया जाएगा।
- डाॅ. राजागणपति आर, जिलाधिकारी