सिद्धार्थनगर। सरकारी गोदामों से मिले सांभा धान के घटिया बीज और खराब हुए फसल की जांच शुरू हो गई है।
डीएम की ओर से गठित तीन सदस्यीय टीम ने इसकी जांच शुरु कर दी है। इटवा, खुनियांव के साथ-साथ जहां बीज बंटी है या फसल बर्बाद हुई है, उसकी जांच कर रिपोर्ट भेजी जाएगी। इसके आधार पर किसानों को मुआवजे की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इटवा तहसील में आयोजित समाधान दिवस में सुनील सिंह समेत कई किसानों ने डीएम डॉ. राजागण पति आर से शिकायत की थी कि उन्हें सरकारी गोदामों से सांभा मसूरी धान के नाम पर घटिया बीज मिला है।
किसानों ने बताया था कि सांभा मसूरी धान सामान्यतः 135 से 140 दिनों में पकता है, जबकि उन्हें मिले बीज से रोपाई के मात्र 25 दिन बाद ही बाली निकलने लगी। यही नहीं, इस धान के चावल में सांभा मसूरी जैसी मिठास और स्वाद भी नहीं है।
शिकायत को गंभीरता से लेते डीएम ने कमेटी गठित की है। इसमें कृषि विभाग के अलावा प्रशासन और राजस्व की टीम लगाई गई। इटवा तहसील क्षेत्र के टिकुइया गांव में टीम ने स्थलीय सत्यापन किया है। अन्य क्षेत्रों में चरणवार जांच शुरू की गई है। इटवा क्षेत्र के में एसडीएम इटवा कुणाल, डीडीओ सतीश कुमार और उप कृषि निदेशक राजेश कुमार की तीन सदस्यीय टीम जांच कर रही है।
इसमें टिकुइया गांव जांच कर चुकी है। अन्य गांवों में टीम जाकर खेत को देख रही है। जिले में 260 क्विंटल बीज का वितरण किया था। इसमें साढ़े सात हजार बीघा फसल धान की रोपाई जिले में हुई है।
इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी मो. मुज्जमिल ने बताया कि टीम गठित हुई है, जो स्थलीय निरीक्षण करके रिपोर्ट तैयार किया जा रहा है।र