सिद्धार्थनगर। चीनी की बढ़ती मांग के बीच जमाखोरी और कालाबाजारी की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। तहसील स्तर पर एसडीएम की अध्यक्षता में टीम गठित की गई है जो स्टाॅक की जांच करेगी। स्टॉक में गड़बड़ी, निर्धारित सीमा से अधिक भंडारण या अभिलेखों में अनियमितता मिलने पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
चीनी की बढ़ती हुई महंगाई और कालाबाजारी के जोखिम को रोकने के लिए शासन ने सख्ती शुरू कर दी है। खाद्य व रसद विभाग की ओर से जारी निर्देशों के मुताबिक चीनी के कारोबारियों के लिए स्टॉक लिमिट भी लागू कर दी गई है। आयुक्त, खाद्य व रसद विभाग का यह नियम एक अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। इसके तहत कोई भी डीलर चीनी का स्टॉक प्राप्ति की तारीख से 30 दिन से अधिक अवधि तक नहीं रख सकेगा।
साथ ही देश में किसी भी समय और किसी भी स्थान पर डीलर के पास 4000 क्विंटल से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं होना चाहिए। स्टॉक की अवधि की गणना में जिस दिन चीनी प्राप्त हुई है, उसे भी शामिल किया जाएगा।
कालाबाजारी न होने पाए इसके लिए कमेटी गठित करके जांच और निगरानी के लिए निर्देशित किया गया है। वहीं स्थानीय स्तर पर जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई। सभी तहसीलों में एसडीएम की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय कमेटी को थोक विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर अभिलेखों और पोर्टल पर दर्ज उपलब्ध स्टॉक का मिलान करना है। निर्धारित सीमा से अधिक स्टॉक मिलने या खरीद-बिक्री के आंकड़ों में अंतर पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
सभी चीनी डीलरों के लिए खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण कराकर अपने स्टॉक की स्थिति घोषित करना अनिवार्य किया गया है। कारोबारियों को पोर्टल पर चीनी की खरीद, बिक्री और उपलब्ध स्टॉक का ब्योरा नियमित रूप से शुक्रवार को अपडेट करना होगा। इससे प्रशासन को जिले में चीनी की वास्तविक उपलब्धता और बाजार में उसकी आवाजाही की जानकारी मिलती रहेगी।