सिद्धार्थनगर। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर बृहस्पतिवार को सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग और मनोवैज्ञानिक परामर्श प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दाैरान वक्ताओं ने बात सुनने, साथ देने और सहयोग कर जीवन बचाने की अपील की।
कार्यक्रम में आत्महत्या की रोकथाम, मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और समय पर भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक सहयोग के महत्व पर चर्चा की गई। बीए और एमए मनोविज्ञान के विद्यार्थियों ने पोस्टर, स्लोगन और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से जागरूकता का संदेश दिया।
मनोविज्ञान विभाग के प्रभारी डॉ. मुन्नू खान ने कहा कि किसी व्यक्ति की बात को ध्यान से सुनना और उसकी भावनाओं को समझना आत्महत्या की रोकथाम की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। समय पर दिया गया सहयोग व्यक्ति को कठिन परिस्थिति से उबरने में मदद कर सकता है। मनोवैज्ञानिक परामर्श प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. हरेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम सामूहिक जिम्मेदारी है। संवेदनशील संवाद, सकारात्मक वातावरण और समय पर काउंसलिंग व्यक्ति में आशा और जीवन के प्रति विश्वास को मजबूत कर सकती है।
कार्यक्रम में डॉ. श्रद्धा पांडेय, पुनीता पाठक और रजनीश कुमार मौर्य ने भी विचार रखे। डॉ. श्रद्धा पांडेय ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल शारीरिक स्वास्थ्य जितनी ही आवश्यक है। सहायता मांगना कमजोरी नहीं बल्कि जागरूकता और साहस का प्रतीक है। पुनीता पाठक ने कहा कि संकेतों को पहचानना और व्यक्ति को सुनना जरूरी है।