शाहपुर। डुमरियागंज नगर के इंद्रा नगर वार्ड में चल रही सात श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन बुधवार की रात को कथा वाचक पं. छेदीलाल मिश्र ने कहा श्रीमद्भागवत कथा भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का सार है।
गोकर्ण ने भी अपने पिता आत्मदेव को श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का उपदेश दिया था।
कथा वाचक पं. छेदीलाल मिश्र ने बताया कि धुंधकारी के प्रेत योनि में चले जाने पर गोकर्ण ने दोबारा श्रीमद्भागवत कथा सुनाकर धुंधकारी को प्रेत योनि से मुक्ति दिलाई थी। उपदेश दिया कि प्रभु को पाने के लिए देह आसक्ति और गेह आसक्ति छोड़नी होगी। शरीर और घर से मोह त्यागने वाला ही प्रभु को पा सकता है।
इस दौरान मुख्य यजमान पवनसुत लाल श्रीवास्तव, अनुराग श्रीवास्तव, भरत लाल श्रीवास्तव, प्रशांत, अभिलाष, अविरल आदि मौजूद रहे।