सिद्धार्थनगर। एसआईआर प्रक्रिया में पुरानी मतदाता सूची समस्या की असल वजह बन गई है। इसमें तमाम मतदाताओं का पूरा नाम अंकित नहीं है। स्वयं या पिता के नाम का प्रथम भाग ही सूची में दर्ज हैं। नाम का दूसरा या तीसरा भाग सरनेम सहित अंकित नहीं है।
अब जब मतदाताओं को अपने पहचान से संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत करना पड़ रहा है तो चुनाव आयोग का पोर्टल उसमें अंकित डाटा का मिलान मतदाता सूची से नहीं कर पा रहा है। डाटा मिस मैच होने से आवेदन निरस्त हो जा रहा है।
जानकार बताते हैं कि गांव के ही लोग बीएलओ को मौखिक विवरण देकर फाॅर्म छह भरवाते रहे, जिसमें नाम, पिता का नाम गांव सब अंकित होता था। इसी आधार पर मतदाता सूची में लोगों का नाम शामिल हो जाता था। वहीं, साड़ी चौराहा के पं. देवेंद्र मिश्र बताते हैं कि पहले फाॅर्म छह भरते समय जैसे किसी का नाम प्रेम शंकर है तो केवल उसका प्रथम भाग प्रेम ही भर दिया जाता था।
वहीं, नाम मतदाता सूची में अंकित चला आ रहा है जबकि संबंधित व्यक्ति के जन्म, निवास, आधार, बैंक पॉसबुक, परिवार रजिस्टर की नकल जैसे प्रपत्रों में पूरा नाम और पता अंकित है। जब साक्ष्य के तौर पर इन्हें लगाया जा रहा है तो मिलान न होने से अस्वीकार कर दे रहा है।
इससे समस्या बढ़ रही है। इसका कोई ठोस विकल्प निकाला जाना चाहिए।
पहले मतदाता सूची में लोगों का पहचान पत्र के अनुसार पूरा नाम अंकित किया जाए। इसके बाद संशोधन, मिलान आदि की प्रक्रिया पूरी कराई जाए।