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Siddharthnagar News: कुत्तों के लिए शेल्टर होम, कम होगा आतंक

Mon, 07 Sep 2026 12:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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शहर के उसका मार्ग पर कुत्तो काझुंड। संवाद
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सिद्धार्थनगर। कुत्तों के आतंक पर नियंत्रण के लिए अब नगर पालिका सिद्धार्थनगर ने शेल्टर होम बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए जमीन की तलाश की जा रही है। दो एकड़ भूमि में जिला स्तरीय शेल्टर होम बनाने की योजना है।
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जमीन चिह्नित होने के बाद शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। इसके बाद बजट आवंटित होने पर निर्माण कार्य शुरू होगा। शेल्टर होम के अस्तित्व में आने के बाद कुत्तों को पकड़ने और उनके नियंत्रण में काफी मदद मिलने की उम्मीद है।
जनपद में कुत्तों के हमले के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। हर माह औसतन चार हजार लोग कुत्तों के काटने का शिकार होते हैं। गर्मी और ठंड के मौसम में कुत्तों के हमले की घटनाएं और बढ़ जाती हैं। जिले में आवारा कुत्तों के नियंत्रण के लिए न तो उन्हें पकड़ने की व्यवस्था है और न ही नसबंदी की कोई ठोस व्यवस्था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के क्रम में शासन की ओर से आवारा कुत्तों के नियंत्रण और शेल्टर होम बनाए जाने के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
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इसी के तहत दो एकड़ भूमि पर जिला स्तरीय शेल्टर होम बनाया जाना है। इसके निर्माण के बाद आवारा कुत्तों को पकड़कर यहां रखने, उनकी नसबंदी, टीकाकरण और उपचार की व्यवस्था की जाएगी। शासन से दिशा-निर्देश मिलने के बाद नगर पालिका प्रशासन ने शेल्टर होम के लिए जमीन की तलाश शुरू कर दी है। मुख्यालय के आसपास जमीन तलाशने को प्राथमिकता दी जा रही है। जमीन मिलने के बाद शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। बजट आवंटन के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा। कुत्तों को पकड़ने, रखने और उनके संरक्षण के लिए समिति भी गठित की जाएगी।
जमीन मिलते ही शुरू होगा काम : नगर पालिका की ओर से शेल्टर होम के लिए उपयुक्त जमीन की तलाश की जा रही है। जमीन का चयन होने के बाद निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। शेल्टर होम बनने से आवारा कुत्तों को व्यवस्थित तरीके से रखने, उनकी निगरानी और आवश्यक उपचार की व्यवस्था होने की उम्मीद है। लोगों का कहना है कि शेल्टर होम केवल कुत्तों को रखने की जगह न होकर आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने का केंद्र बन सकता है। यदि यहां कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण नियमित रूप से कराया गया तो आने वाले वर्षों में उनकी अनियंत्रित आबादी पर रोक लग सकती है।
इससे कुत्तों के काटने के मामलों में कमी आने के साथ अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन के लिए पहुंचने वाले मरीजों का दबाव भी कम होने की उम्मीद है। हालांकि, शेल्टर होम के निर्माण के साथ उसके नियमित संचालन, पर्याप्त स्टाफ, कुत्तों की नसबंदी-टीकाकरण और निगरानी की ठोस व्यवस्था जरूरी होगी। तभी इस योजना से सड़क पर घूमते कुत्तों के आतंक से लोगों को वास्तविक राहत मिल सकेगी।
बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा खतरा : सुबह और शाम के समय गलियों तथा मोहल्लों में कुत्तों के झुंड राहगीरों के लिए खतरा बन जाते हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों के अलावा साइकिल और बाइक सवार भी इनके हमले की चपेट में आ जाते हैं। कई बार कुत्तों के पीछे दौड़ने से वाहन सवार गिरकर घायल हो जाते हैं।
कुत्तों के बढ़ते आतंक से लोगों में डर का माहौल है। आए दिन लोगों के कुत्तों के काटने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। कई बार कुत्ते दूसरे पशुओं पर भी हमला कर देते हैं।
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