- जाति सत्यापन समिति की जांच में कहार जाति का निकला परिवार, पुराने राजस्व अभिलेख और ग्रामीणों के बयान बने आधार
सिद्धार्थनगर। जनपद स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति ने कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर बनाए गए एक ही परिवार के सात अनुसूचित जनजाति (एसटी) प्रमाण पत्र निरस्त कर दिए हैं। जांच में उस्का बाजार विकास क्षेत्र के सुगही ग्राम पंचायत निवासी परिवार को पिछड़ा वर्ग की कहार जाति का पाया गया। कार्रवाई बरदहा ग्राम पंचायत के घुमैठा निवासी शिवम सिंह की शिकायत पर की गई।
शिकायतकर्ता शिवम सिंह ने बताया कि इससे पहले भी संबंधित प्रमाण पत्र निरस्त किए गए थे लेकिन प्रभावित पक्ष ने उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त कर जिलाधिकारी के निर्णय को चुनौती दी थी। न्यायालय के आदेश के बाद उन्होंने दोबारा शिकायत की, जिस पर जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने अपर जिलाधिकारी, एसडीएम, जिला समाज कल्याण अधिकारी, तहसीलदार और सतर्कता प्रकोष्ठ के अधिकारियों की समिति गठित कर मामले की जांच कराई।
जांच में समिति ने पाया कि सुगही ग्राम पंचायत निवासी नंदलाल मूल रूप से पिछड़ा वर्ग की कहार जाति से हैं। पुराने अभिलेखों में उनके पिता और बाबा की जाति भी कहार दर्ज मिली। इसके अलावा उनके सगे चाचा और भतीजे वर्तमान में भी अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के कहार समुदाय में दर्ज हैं। इसके बावजूद नंदलाल ने तथ्य छिपाकर अपने परिवार के सदस्यों के नाम अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र बनवा लिए।
समिति ने जांच के दौरान वर्ष 1333 और 1359 फसली के राजस्व अभिलेख, रजिस्ट्री दस्तावेज, वर्ष 2020 की जांच रिपोर्ट, बीडीओ एवं तहसीलदार की रिपोर्ट, विद्यालय के ट्रांसफर सर्टिफिकेट और ग्रामीणों के बयान सहित अन्य दस्तावेजों का परीक्षण किया। रिपोर्ट में कहा गया कि उपलब्ध साक्ष्यों से स्पष्ट रूप से साबित हुआ कि संबंधित परिवार कहार जाति से संबंधित है। वहीं नंदलाल अपने पक्ष में अनुसूचित जनजाति से संबंधित कोई ठोस या प्रमाणिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।
जांच रिपोर्ट के आधार पर जनपद स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति ने नंदलाल, सावित्री, मनोज कुमार, स्व. जितेंद्र कुमार, सुनैना, प्रिंस और मुस्कान के अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर जारी पाए जाने पर उन्हें निरस्त कर दिया है। समिति ने संबंधित विभागों को आवश्यक अग्रिम कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं।
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। इसमें अभिलेख और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद नंदलाल और इनके परिजन पिछड़ा वर्ग कहार जाति के पाए गए हैं। इनका और परिवार के सदस्यों का अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया गया है।
- एमपी सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी, सिद्धार्थनगर