शोहरतगढ़। शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा की शक्ति और ममता की आराधना के बीच चिल्हिया क्षेत्र के मुडिला बुजुर्ग गांव की संगीता संघर्ष और हौसले की मिसाल बनी हैं। वर्ष 2023 में पति की मौत के बाद उन्होंने पांच बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी अकेले संभाली।
विषम परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और आशा कार्यकर्ता के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाने के साथ बच्चों का भविष्य संवारने में जुटी हैं।
संगीता शोहरतगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में आशा कार्यकर्ता हैं। उनके पति दुर्गेश दिल्ली की एक स्टील कंपनी में काम करते थे और परिवार का भरण-पोषण करते थे। वर्ष 2023 में हृदय गति रुकने से उनकी मौत हो गई।
इसके बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी संगीता के कंधों पर आ गई। पांच बच्चों की परवरिश और उनकी पढ़ाई की चिंता के बीच उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और मेहनत के दम पर परिवार को संभालने का संकल्प लिया।
परिवार के साथ समाजसेवा की जिम्मेदारी : परिवार की जिम्मेदारियों के साथ संगीता आशा कार्यकर्ता के रूप में भी सक्रिय हैं।
वह लोगों तक स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां पहुंचाने और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करने का काम करती हैं। कठिन परिस्थितियों के बावजूद परिवार और काम के बीच संतुलन बनाकर वह अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए जुटी हैं।