सिद्धार्थनगर। सर्दी का मौसम शुरू हो चुका है। कपड़े, रजाई, गद्दे, कंबल आदि की बिक्री ने भी रफ्तार पकड़ ली है। साल दर साल बदलते ट्रेंड में रूई वाली रजाई की जगह इस बार कंबल की बिक्री बढ़ी है। इससे अब शहर में जगह-जगह दुकानदार ठंड शुरू होने से पहले ही कंबल की दुकान सजा रहे हैं।
हल्का और लंबाई चौड़ाई में बड़ा मिलने के साथ ठंड में कारगर साबित होने से लोग अब कंबल की मांग अधिक कर रहे हैं। इससे रजाई का व्यापार घट रहा है जबकि कंबल मांग अधिक होने से जगह-जगह दुकानें भी सज रही हैं। रजाई में भरी जाने वाली रूई की धुनाई करने वाले मजदूरों ने बताया कि अब इस रजाई का चलन कम हुआ है। अब शौकीन लोग ही इसको पसंद करते हैं।
उसका मार्ग पर कंबल की दुकान सजाने वालों के मुताबिक अब कंबल व फाइबर वाली रजाई की बिक्री हो रही हैं। शहर के अरविंद व विनय व दीपक ने बताया कि रूई वाली रजाई का वजन जहां ज्यादा होता है। वहीं कंबल ज्यादा जल्दी गरम होते हैं।
कंबल विक्रेता शिवानंद ने बताया कि कंबलों के अंदर एकरैलिक नाम के पदार्थ के धागों का इस्तेमाल होता है जो ज्यादा हल्का होता है। वहीं ओढ़ने के बाद यह तेजी से गरम भी हो जाता है। इस वजह से कंबलों का चलन बढ़ा है।
चलन में आईं फाइबर की रजाई व एकरैलिक के कंबल इतने हल्के होते हैं कि बच्चे भी आसानी से इनकों उठाकर इधर से उधर कर सकते हैं जबकि परंपरागत रजाई का आकार थोड़ा बड़ा और वजन ज्यादा होता है। कंबल विक्रेता श्रवण ने बताया कि कंबल बाजार में 500 से लेकर पांच हजार तक मिल रहे हैं।
व