भनवापुर। हिंदू धर्म में माघ मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है। इसी दिन संतान के सुख, समृद्धि और लंबी आयु के लिए सकट चौथ का व्रत मनाया जाता है।
यह जानकारी देते हुए क्षेत्र के गालापुर वटवासिनी महाकाली मंदिर के व्यवस्थापक डॉ. ठाकुर प्रसाद मिश्र ने बताया कि सनातन परंपरा में संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए सकट चौथ व्रत का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है। माघ मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाए जाने वाले इस व्रत को तिलवा चौथ, तिल-कुटा चौथ, माघी चौथ, वक्र-तुण्डि चतुर्थी आदि के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत सकट माता, भगवान गणेश और चंद्र देवता की पूजा-अर्चना और व्रत से जुड़ा है। सकट चौथ का पर्व अत्यंत ही पुण्यदायी माना गया है।
हिंदू महिलाएं जिस सकट चौथ व्रत को अपने संतान की तरक्की के लिए पूरे विधि-विधान से रखती हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष यह पर्व पंचांग के अनुसार माघ मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि 06 जनवरी 2026 को प्रात: काल 08:01 बजे प्रारंभ होकर अगले दिन 07 जनवरी 2026 को प्रात: काल 06:52 बजे समाप्त होगी। ऐसे में सकट चौथ का पावन पर्व 06 जनवरी को ही मनाया जाएगा। इस दिन चंद्र देवता का उदय रात्रि 8:35 पर होगा।
सकट चौथ का व्रत रखने के लिए इस दिन प्रात:काल स्नान-ध्यान करने के बाद विघ्नहर्ता और सुखकर्ता कहलाने वाले भगवान श्रीगणेश की विधि-विधान से पूजा करें। पूजा में गणपति की प्रिय चीजें जैसे दूर्वा, मोदक, तिल के लड्डू आदि अवश्य अर्पित करें।