सिद्धार्थनगर। आवारा कुत्तों और कुत्ते के काटने की घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश अब कागजों से निकलकर जमीन पर उतरते दिख रहे हैं। उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए जारी निर्देशों का पहला ठोस असर सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में नजर आया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर और उससे जुड़े सभी महाविद्यालयों के लिए नोडल अधिकारी नामित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इससे जहां कैंपस में आवारा कुत्तों को रोकने के प्रभावी इंतजाम किए जाएंगे, वहीं निगहबानी से इलाज तक की व्यवस्था नोडल अफसर के जिम्मे होगी।
उच्च शिक्षा निदेशालय, प्रयागराज द्वारा 30 दिसंबर को जारी आदेश के बाद विश्वविद्यालय स्तर पर त्वरित कार्रवाई तेज कर दी गई है। विश्वविद्यालय ने अपने अधीन आने वाले सभी संबद्ध कॉलेजों से नोडल अधिकारी की सूचना, जिम्मेदारी प्रमाण पत्र और अनुपालन आख्या तत्काल मांगी है। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा 22 अगस्त और सात नवंबर 2025 को पारित आदेशों तथा पशु कल्याण बोर्ड ऑफ इंडिया द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुपालन में की जा रही है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, आदेश स्पष्ट है कि शिक्षण परिसरों में छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
पिछले कुछ वर्षों में विश्वविद्यालय परिसर, छात्रावासों और कॉलेज कैंपस में आवारा कुत्तों की मौजूदगी को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। कई बार छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ाई है।