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Siddharthnagar News: सरहद पर छूटा नेपाल से आई बहुओं के मतदान का हक

Tue, 03 Feb 2026 11:12 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल के बीच वर्षों से चले आ रहे ‘रोटी-बेटी’ के रिश्ते पर अब नागरिकता और मतदान के अधिकारों की जटिलता का साया पड़ता दिख रहा है। सीमावर्ती जनपदों में नेपाली मूल की हजारों महिलाएं भारतीय परिवारों में विवाह कर दशकों से रह तो रही हैं, लेकिन सरहद और कागजी पेच के ग्रहण ने उनसे मतदान करने का हक छीन लिया है।
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नेपाल से शादी कर नौगढ़ तहसील के अहिरौली गांव की बहू बनी कुसुम कहतीं हैं कि अगर पता होता कि शादी के बाद मतदाता बनने में इतनी अड़चन आएगी तो भारत में विवाह के लिए पहले ही मना कर देते।
मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान नागरिकता से जुड़े स्पष्ट नियमों के अभाव और दस्तावेजों की कमी ने बड़ी संख्या में नेपाली महिलाओं को मतदाता सूची से बाहर कर दिया है। हालात ऐसे हैं कि जिन महिलाओं ने जीवन भर भारत में परिवार बसाया, बच्चों को जन्म दिया और सामाजिक जिम्मेदारियां निभाईं, वे अभी भी मतदान जैसे संवैधानिक अधिकार के लिए कागजी दांव-पेच में उलझ गईं हैं। केवल सीमा पार की होने से नेपाली बहुओं के भारतीय होने का हक भी बदल गया है।
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जनपद नेपाल बार्डर से लगा हुआ है, लंबे अरसे से यहां दोनों देशों के बीच रोटी-बेटी के रिश्ते चल रहे हैं। यहां की बेटी वहां और वहां की बेटी की शादी भारत में हुई है। ब्याह करके भारत आईं महिलाएं दशकों से यहां रह रही हैं। वे आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेजों में शामिल होने के बाद भी एसआईआर में उनका नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पा रहा है। कारण उन्हें जन्म स्थान से जुड़े अभिलेख प्रस्तुत करने हैं, जो उनके पास हैं नहीं। नागरिकता प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की अनुपलब्धता के चलते उनके आवेदन खाारिज कर दिए हैं। ऐसे में यह दस्तावेज उनके लिए संकट बन गए हैं। अब जिले के विभिन्न हिस्सों के अलावा सीमावर्ती इलाकों में लगभग 15 हजार से अधिक नेपाली बहुएं भारतीय नागरिकता का वैधानिक प्रमाण प्रस्तुत न कर पाने के कारण मतदाता सूची में नाम दर्ज नहीं करा सकी हैं। एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान स्थानीय स्तर पर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश न होने से भ्रम और बढ़ गया है। इसके विपरीत, भारत से बाहर जन्म लेने वाले प्रवासी भारतीयों के बच्चों को एसआईआर में शामिल करने के लिए प्रावधान मौजूद है, जिससे स्थानीय महिलाओं में असंतोष और असमानता की भावना बढ़ती दिख रही है।
विदेश में जन्मे भारतीय बच्चों को मिल रहा अवसर: शासन की रिपोर्ट से राहत यह है कि विदेश में जन्म लेने वाले भारतीय मूल के बच्चों को नाम एसआईआर में शामिल किया जा सकता है। उन्हें शासन की ओर से जारी गाइडलाइन का पालन करते हुए आवेदन करना होगा। प्रक्रिया पूरी करने के बाद वह मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे।
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