औराताल। क्षेत्र के बघमरा में आयोजित रामकथा में कथावाचक सौरभ कृष्ण शास्त्री ने प्रभु श्रीराम जन्म प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि प्रभु ने हमेशा अधर्म पर धर्म की विजय के लिए अवतार धारण किया है। जब-जब धरती पर असुरों का अत्याचार बढ़ा है, तब तब प्रभु ने किसी न किसी रूप में अवतार लेकर प्राणियों की रक्षा की है। साथ ही अहंकारियों के अहंकार को मिटाकर लोगों को सही रास्ते पर चलने का संदेश दिया।
उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रभु श्रीराम के चरित्र को जीवन में आत्मसात करने की लिए संकल्पित किया। बताया कि महाराजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ किया। यज्ञ का समय आने पर महाराज दशरथ सभी अभ्यागतों और अपने गुरु वशिष्ठ समेत अपने परम मित्र अंग देश के अधिपति श्रृंगी ऋषि के साथ यज्ञ मंडप में पधारे, फिर विधिवत यज्ञ शुभारंभ किया गया। यज्ञ की समाप्ति के बाद समस्त पंडितों, ब्राह्मणों, ऋषियों आदि को यथोचित धन-धान्य, गो आदि भेंट दी गई है और उन्हें सादर विदा किया गया। इस दौरान दद्दन पांडेय, पप्पू पांडेय, राधेश्याम यादव, हरिओम पाठक, गुलाब, शेषदत्त पांडेय रहे।