मेडिकल कॉलेज के एमसीएच बिंग में महिलाओं की लगी भीड़। संवाद
सिद्धार्थनगर। गर्भावस्था में महिलाएं ध्यान नहीं देने और विशेष आहार नहीं लेने के कारण उनमें समस्याएं आ रहीं हैं। इससे जहां उन्हें परेशानी हो रही है, वहीं बच्चों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है जबकि मेडिकल कॉलेज में सुरक्षित प्रसव, प्रसव पूर्व जांच आदि की व्यवस्था भी है। लेकिन महिलाएं खुद का ध्यान नहीं देने और बाहरी वस्तुओं का अधिक सेवन करने से परेशानी में आ रही हैं।
जिले में लगभग 30 प्रतिशत गर्भवतियां एनीमिया से जूझ रही हैं जबकि कई महिलाओं में हीमोग्लोबिन की कमी पाई गई है। ऐसे में महिलाएं खुद भी बीमार हो रही हैं। इसके साथ ही बच्चों का भी स्वास्थ्य खराब हो रहा हैं। मेडिकल कॉलेज की डॉ. शाहीन बानो ने बताया कि गर्भवतियों में खून की कमी अधिक मिल रही हैं।
उन्होंने बताया कि गर्भवतियों में खून की कमी से बच्चे भी कमजोर होने का खतरा रहता है जबकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से गर्भवतियों महिलाओं को आयरन और कैल्शियम का टैबलेट दिया जाता है।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवती और धात्री माताओं को कैल्शियम और आयरन का टेबलेट दिया जाता है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत प्रत्येक माह की नौ तारीख को सभी सरकारी अस्पतालों में विशेष कैंप लगाकर गर्भवतियों के स्वास्थ्य की जांच की जाती है।