सिद्धार्थनगर/ भनवापुर। फाइनेंस कंपनी के मकड़जाल में फंसे संतकबीनगर जनपद के एक युवक ने उत्पीड़न से तंग आकर जान दे दी। इसी प्रकार की घटनाएं जिले भी होते-होते बच गई है। परेशान होकर किसी ने जहर खा लिया तो किसी ने फंदे से लटक कर जान देने की कोशिश की।
गनीमत रही कि समय पर जानकारी होने से लोगों ने उन्हें बचा लिया गया। पर जिस हिसाब से जिले में फाइनेंस कंपनियों को सिंडिकेट काम कर रहा है। अगर कोई पीड़ित आवाज भी उठाता है तो कानूनी लड़ाई की कहानी सुनने के बाद वह पिछड़ जा रहा है। ऐसे में किसी बड़ी अनहोनी से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
कुछ ऐसा ही हुआ त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र के डोकम अमया निवासी दुर्गावती के साथ। एजेंट ने घर पर चढ़कर मारपीट की, जान से मारने की धमकी दी। महिला ने कार्रवाई के लिए आगे आकर तहरीर दी। लेकिन, अब वह कोई कार्रवाई नहीं चाहती है। ऐसा उसने पुलिस को लिखकर दे दिया है। इस प्रकार से पहले भी हो चुका है। लेकिन, इन पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
वहीं, विधि विशेषज्ञ का कहना है कि जहां लोगों का शोषण हो रहा है, उस मामले में पुलिस स्वत: संज्ञान में लेकर जांच और कार्रवाई कर सकती है।
आगे बढ़ी, फिर हट गई पीछे: भनवापुर। त्रिलोकपुर व इटवा थाना क्षेत्र में इन दिनों प्राइवेट माइक्रो फाइनेंस कंपनी पूरी तरह से सक्रिय हैं। हाल ही में फाइनेंस कंपनी मिडलैंड की ठगी का शिकार हुई त्रिलोकपुर क्षेत्र के डोकम अमया गांव की महिला दुर्गावती ने पहले त्रिलोकपुर पुलिस को शिकायती पत्र देकर वसूली करने वाले एजेंट पर किश्त वसूली के नाम पर मारपीट और गाली-गलौज का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी।
पुलिस ने शिकायती पत्र के बाद जांच में पहुंची तो पीड़ित महिला ने कोई कार्रवाई नहीं करने की बात लिखकर पुलिस को दे दिया। इसी तरह इटवा थाना क्षेत्र के चौखड़ा गांव निवासी सुरेंद्र पांडेय ने भी माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के शिकार होने के बाद पुलिस को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की। मगर पुलिस ने बिना किसी कार्रवाई के ही फाइनेंस कंपनी के एजेंट व पीड़ित को बुलाकर समझौता करा दिया।
यह तो बानगी मात्र है इसी तरह से क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक लोग विशेषकर गरीब तपके की महिलाएं शिकार हो चुकी है, मगर सामाजिक लोक लज्जा के कारण सामने नहीं आ रही हैं। ऐसे में पुलिस भी पीछे हट गई।