सिद्धार्थनगर। डीएम की कार्रवाई का असर अफसरों पर नहीं नजर आ रहा है। एक दिन पहले हुई जांच में अनुपस्थित 81 अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई के बाद शुक्रवार को भी कार्यालयों में अफसर और अधिकांश कर्मी नदारद दिखे। दोपहर 12:15 से 12:55 के बीच विकास भवन में स्थित विभिन्न विभागों के कार्यालय में अधिकारियों की कुर्सियां खाली नजर आईं। इससे अपने कार्य और समस्या को लेकर पहुंचे फरियादी परेशान नजर आए। उनका कहना था कि उनकी समस्याएं कौन सुनेगा और उनका निस्तारण कैसे हो सकेगा, जब कोई अधिकारी नहीं मिल रहे हैं। संवाद न्यूज एजेंसी की टीम शुक्रवार को कलक्ट्रेट, विकास भवन और सीएमओ कार्यालय पहुंची, जहां लोगों ने अपनी दर्द बयां किया।
टीम विकास भवन के द्वितीय तल पर पहुंची। यहां स्थित कार्यालय कक्ष खुला था, लेकिन अधिशासी अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण और प्रखंडीय लेखाधिकारी अपनी कुर्सी पर बैठे नहीं दिखे। इसके आगे बढ़ने पर जिला कार्यक्रम अधिकारी का कक्ष भी खुला मिला, लेकिन वह भी कुर्सी पर नहीं थे। इसी तरह मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी कक्ष में भी अधिकारी अपनी सीट पर नजर नहीं आए। वहीं, जिला दिव्यांगजन अधिकारी और डूडा के पीडी का कक्ष भी खुला था, लेकिन वह भी कुर्सी पर नजर नहीं आए जबकि इन कार्यालयों पर कार्य से आने वाले फरियादी अधिकारियों के नहीं मिलने पर मायूस होकर वापस लौटते नजर आए। ऐसी हालत तब है जब एक दिन पहले बृहस्पतिवार को ही जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने स्वयं कलेक्ट्रेट एवं उनके निर्देश पर सीडीओ बलराम सिंह ने विकास भवन स्थित कार्यालयों की जांच करके अनुपस्थित अधिकारियों व कर्मियों पर कार्रवाई की है।
एक दिन पहले अनुपस्थित कर्मियों पर हुई थी कार्रवाई: जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने कलक्ट्रेट स्थित कार्यालय का बृहस्पतिवार को निरीक्षण किया था, जिसमें अनुपस्थित मिले अधिकारियों व कर्मचारियों का एक दिन का वेतन अवरुद्ध करने तथा स्पष्टीकरण तलब करने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में विकास भवन में सीडीओ बलराम सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय और तहसील नौगढ़ में भी एडीएम गौरव श्रीवास्तव ने जांचकर अनुपस्थित कर्मियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इस कार्रवाई के बाद अधिकारियों व कर्मियों को मिलने की उम्मीद थी, लेकिन स्थिति एक दम उलट नजर आई।