- नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश का असर सिद्धार्थनगर तक, राप्ती-बूढ़ी राप्ती समेत प्रमुख नदियां उफनती हैं
सिद्धार्थनगर। नेपाल के रसुवा में 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने से आई विनाशकारी बाढ़ के बाद सीमा से सटे तराई जिलों में चिंता बढ़ गई है। हालांकि सिद्धार्थनगर में प्रवेश करने वाली प्रमुख नदियों और प्राकृतिक नालों के उद्गम स्थल वाले नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में ग्लेशियर नहीं हैं। यहां बारिश के पानी से ही नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ता है। नेपाल में होने वाली भारी बारिश का सीधा असर जिले में दिखाई देता है और नदियों के उफान से बाढ़ की स्थिति पैदा हो जाती है।
आपदा विशेषज्ञों के अनुसार जिले में आने वाली नदियों के उद्गम स्थल पर ग्लेशियर नहीं होने के कारण ग्लेशियर टूटने जैसी घटना से नेपाल के रसुवा जैसी अचानक तबाही की आशंका बेहद कम है। हालांकि नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार भारी बारिश होने पर नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने से जिले में बाढ़ का खतरा बना रहता है।
जिले की सबसे प्रमुख राप्ती नदी का उद्गम नेपाल के भालुवांग के लघु हिमालय क्षेत्र में है। यहां से राप्ती श्रावस्ती बैराज और बलरामपुर होते हुए सिद्धार्थनगर में प्रवेश करती है। वहीं बानगंगा नदी नेपाल के अर्घाखांची क्षेत्र से निकलकर सीधे शोहरतगढ़ क्षेत्र में प्रवेश करती है। शोहरतगढ़ में बानगंगा पर बैराज भी बना है। नेपाल के बुटवल क्षेत्र के पहाड़ों से निकलने वाली कूड़ा और घोघी नदियां लोटन क्षेत्र में जिले में प्रवेश करती हैं। बूढ़ी राप्ती भी नेपाल से बलरामपुर होते हुए जिले में आती है। इन नदियों के उद्गम क्षेत्रों में ग्लेशियर नहीं हैं लेकिन भारी बारिश होने पर जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है।
2021-22 में बांधों पर बढ़ गया था दबाव
नेपाल में हुई भारी बारिश के कारण वर्ष 2021-22 में राप्ती और बूढ़ी राप्ती नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया था। इससे नदी किनारे बने बांधों पर पानी का दबाव बढ़ गया था। आबादी क्षेत्र को बाढ़ से बचाने के लिए सिंचाई विभाग को गैर आबाद क्षेत्र में दो स्थानों पर बांध काटना पड़ा था। वर्ष 1998 में आई भीषण बाढ़ में कई बांध टूट गए थे। इस दौरान 52 लोगों की मौत हुई थी। जिले का करीब दो तिहाई हिस्सा जलमग्न हो गया था और फसलें नष्ट होने से लोगों के सामने खाद्यान्न का संकट खड़ा हो गया था।
जिले में बारिश न होने पर भी बढ़ा नदियों का पानी
पिछले कई दिनों से जिले में बारिश नहीं हुई है, इसके बावजूद प्रमुख नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी है। शनिवार को रात में अचानक नदियों का जलस्तर बढ़ गया। रविवार सुबह नदियों में उफान दिखाई दिया। इससे स्पष्ट है कि नेपाल के उद्गम क्षेत्रों में होने वाली बारिश का असर जिले की नदियों के जलस्तर पर पड़ता है।
ड्रेनेज खंड के अधिशासी अभियंता कृपाशंकर भारती ने बताया कि नेपाल में स्थित नदियों के उद्गम स्थल पर बारिश होने से ही यहां नदियों का जलस्तर बढ़ता है।
नेपाल के प्राकृतिक नाले भी बढ़ाते हैं मुसीबत
नेपाल से निकलकर जिले में प्रवेश करने वाले प्राकृतिक नाले भी बारिश के दौरान परेशानी बढ़ाते हैं। शहर के नजदीक से होकर गुजरने वाला जमुआर नाला बारिश में उफान पर आ जाता है। इससे तेतरी-सोहांस और नौगढ़-बर्डपुर मार्ग पर पानी चढ़ने से आवागमन बाधित होता है। शहर के आसपास के कई गांव भी बाढ़ के पानी से घिर जाते हैं। मोहाना क्षेत्र में नेपाल से आने वाले तेलार प्राकृतिक नाले के कटान से कई गांव प्रभावित होते हैं। वहीं जोगिया और बांसी क्षेत्र में फजिहतवा नाले के उफान से कई गांव जलमग्न हो जाते हैं।
गेज स्टेशन से मिलती है जलस्तर बढ़ने की जानकारी
नदियों का जलस्तर चेतावनी स्तर पार करते ही जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग सतर्क हो जाता है। बानगंगा पर शोहरतगढ़ बैराज, कूड़ा नदी पर आलमनगर और रेलवे पुल के पास गेज स्टेशन हैं। राप्ती नदी पर बांसी पुल तथा बूढ़ी राप्ती पर परसोहन घाट, मुंहचोरवा घाट और ककरही पुल के पास गेज स्टेशन स्थापित हैं। इसके अलावा घोघी नदी पर लोटन पुल, तेलार नाले पर सड्डा पुल और जमुआर नाले पर नौगढ़ पुल के पास भी गेज स्टेशन हैं। इन स्थानों से जलस्तर बढ़ने की जानकारी मिलते ही संबंधित विभाग अलर्ट हो जाते हैं और स्थानीय स्तर पर सावधानी बरती जाती है।
नेपाल स्थित जिले की नदियों के उद्गम स्थल पर ग्लेशियर नहीं हैं। वहां बारिश से ही नदियों का जलस्तर बढ़ता है और जिले में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है।
- कृपाशंकर भारती, अधिशासी अभियंता, ड्रेनेज खंड