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Siddharthnagar News: मानसून का नया दौर शुरू, तराई में दो दिन भारी बारिश की चेतावनी

Wed, 05 Aug 2026 11:46 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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शहर के सिद्धार्थ तिराहे पर दोपहर में बारिश के दौरान भीगते लोग। संवाद
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- तराई क्षेत्र में जलभराव और नदियों के बढ़ते जलस्तर की आशंका
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सिद्धार्थनगर। तराई जिले सिद्धार्थनगर में बुधवार से मौसम फिर करवट ले चुका है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के लखनऊ केंद्र ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए अगले दो दिन अच्छी वर्षा की संभावना व्यक्त की है। इससे राप्ती, बूढ़ी राप्ती, बानगंगा सहित छोटी नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ सकता है। निचले इलाकों में जलभराव और ग्रामीण संपर्क मार्गों पर आवागमन प्रभावित होने की आशंका है।
मौसम विभाग के सात दिन के पूर्वानुमान के अनुसार छह अगस्त को पूर्वी उत्तर प्रदेश के अनेक स्थानों पर वर्षा और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। सात अगस्त से बारिश की तीव्रता कुछ कम हो सकती है लेकिन छिटपुट वर्षा का सिलसिला बना रहेगा।बुधवार को जिले के अलग-अलग हिस्से में अच्छी बारिश हुई। देर रात तक बूंदाबांदी का दौर चलता रहा। इस बीच अधिकतम तापमान में तीन डिग्री की गिरावट दर्ज की गई।
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जानकारों के अनुसार सिद्धार्थनगर नेपाल सीमा से सटा तराई जिला है। यहां लगातार बारिश होने पर खेतों में पानी भरने, कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचने और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने की आशंका रहती है।
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जिला कृषि अधिकारी डॉ. रविशंकर पांडेय का मानना है कि धान की फसल के लिए यह बारिश लाभकारी हो सकती है लेकिन अधिक वर्षा होने पर खेतों में जलभराव से पौधों को नुकसान भी पहुंच सकता है। किसानों को खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था रखने की सलाह दी जा रही है।
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अगले सात दिन का पूर्वानुमान
- छह अगस्त : अनेक स्थानों पर बारिश, कहीं-कहीं भारी वर्षा।
- सात अगस्त : कुछ स्थानों पर बारिश, भारी वर्षा की चेतावनी नहीं।
- आठ से 11 अगस्त : छिटपुट स्थानों पर बारिश की संभावना, कोई विशेष चेतावनी नहीं।
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संभावित असर
- निचले इलाकों में जलभराव।
- राप्ती, बानगंगा और स्थानीय नालों का जलस्तर बढ़ने की आशंका।
- ग्रामीण सड़कों पर आवागमन प्रभावित हो सकता है।
- बिजली गिरने की घटनाओं का खतरा।
- धान की फसल को लाभ, लेकिन अधिक पानी से नुकसान की भी संभावना।
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क्या करें, क्या न करें
- मौसम की चेतावनी पर लगातार नजर रखें।
- गरज-चमक के दौरान खुले मैदान में न रहें।
- जलभराव वाले रास्तों से गुजरने से बचें।
- बच्चों को नदी और नालों के पास न जाने दें।
- किसान खेतों की जलनिकासी की व्यवस्था रखें।
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