-डुमरियागंज थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी किशोरी की जहरीला पदार्थ खाने से हुई मौत का मामला, पुलिस खाली हाथ
भनवापुर। डुमरियागंज थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी 17 वर्षीय किशोरी के जहरीला पदार्थ खाने से इलाज के दौरान हुई मौत के मामले में हर कदम पर पुलिस की लापरवाही सामने आई है। परिवार के लोगों का आरोप है कि जहर खाने के बाद ही आरोपी के खिलाफ शिकायत की गई थी, लेकिन पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करना और उसे पकड़ना मुनासिब नहीं समझा। मौत के बाद भाभी की तहरीर पर मंगलवार को डुमरियागंज पुलिस ने एफआईआर तो दर्ज कर ली, लेकिन तबतक आरोपी लाइनमैन जोगिंदर यादव पुलिस की गिरफ्त से दूर निकल चुका था।
मिली जानकारी के अनुसार, क्षेत्र के एक गांव निवासी 17 वर्षीय किशोरी ने क्षेत्र के कूंडी गांव निवासी लाइनमैन जोगिंदर के द्वारा फोन पर धमकी देने से आहत हो कर 17 जनवरी को जहर खा लिया। परिजनों ने उसे तत्काल सीएचसी बेंवा ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे बस्ती कैली के लिए रेफर कर दिया, वहां से डाक्टरों ने किशोरी की हालत गंभीर देख मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के लिए रेफर कर दिया। गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मंगलवार को तड़के करीब तीन बजे किशोरी की मौत हो गई। गोरखपुर से पीएम कराकर परिजन शव लेकर पहुंचे और मंगलवार को देर रात में उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
प्रभारी निरीक्षक डुमरियागंज श्रीप्रकाश यादव ने बताया कि आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस प्रयास कर रही है। जल्द ही वह पुलिस की गिरफ्त में होगा।
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पहले प्राथमिकी में देर, अब आरोपी को पकड़ने में फेल
डुमरियागंज थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी किशोरी ने 17 जनवरी को शाम करीब चार बजे विषाक्त पदार्थ खा लिया। इसकी तहरीर डुमरियागंज पुलिस को किशोरी की भाभी ने दूसरे दिन यानी 18 जनवरी को ही दी थी। शिकायती पत्र मिलने के बाद पुलिस बिना किसी कार्रवाई के हाथ पर हाथ रखे बैठी रही। मंगलवार को सुबह पुलिस को किशोरी के मौत की सूचना मिलते ही तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर ली। अब सवाल उठता है कि क्या डुमरियागंज पुलिस आरोपी पर कार्रवाई के लिए मौत का इंतजार कर रही थी। वहीं, जब पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली थी तो आरोपी की गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई। वहीं, सूत्रों की मानें तो इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस की ही भूमिका संदिग्ध है। परिवार के लोग भी ऐसा आरोप लगा रहे हैं।