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Siddharthnagar News: औषधि केंद्रों को सता रहा किल्लत का रोग

Sat, 17 Oct 2026 12:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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शहर में स्थित जन औषधि केंद्र पर दवा की खरीदारी करते लोग
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सिद्धार्थनगर। महंगी दवाओं से राहत दिलाने के लिए खोले गए प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों पर ही मरीजों को जरूरत की दवाओं के लिए भटकना पड़ रहा है। जिले में संचालित 42 केंद्रों में से कई पर मांग के अनुरूप दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में मरीज खाली हाथ लौट रहे हैं।
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मरीजों का आरोप है कि डॉक्टर पर्चे पर चार-पांच दवाएं लिखते हैं लेकिन केंद्र पर तीन-चार ही मिल पाती हैं। बाकी दवाओं के लिए उन्हें बाजार का रुख करना पड़ता है, जहां वही दवाएं कई गुना अधिक कीमत पर खरीदनी पड़ती हैं।
वहीं, केंद्र संचालकों का कहना है कि समय से और मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं होने से यह समस्या पैदा हो रही है। हालांकि, जिम्मेदार अधिकारी दवाओं की आपूर्ति में किसी तरह की दिक्कत से इन्कार कर रहे हैं।
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जन औषधि केंद्रों पर दवाएं बाजार की तुलना में 40 से 90 प्रतिशत तक कम कीमत पर उपलब्ध कराई जाती हैं। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को भी सस्ती दवाएं उपलब्ध कराना है। जिले में एक केंद्र मेडिकल कॉलेज, 13 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य केंद्र बाजार क्षेत्रों में संचालित हैं।
मेडिकल कॉलेज के केंद्र पर प्रतिदिन करीब 500 से 800 मरीज, सीएचसी के केंद्रों पर 100 से 200 और कस्बों के केंद्रों पर 100 से 300 तक मरीज दवाएं लेने पहुंचते हैं। इसके बावजूद कई मरीजों को पूरी दवा नहीं मिल पा रही है।
20 की दवा बाजार में 200 रुपये तक : शहर के एक जन औषधि केंद्र पर दवा लेने पहुंचे दिनेश ने बताया कि उन्हें गैस, दर्द और नस से संबंधित तीन दवाएं लेनी थीं। गैस और दर्द की दवा तो मिल गई लेकिन नस से संबंधित दवा उपलब्ध नहीं थी।
केंद्र पर इस दवा की 10 गोलियों की कीमत 95 रुपये है, जबकि बाजार में इसके लिए 185 रुपये देने पड़ते हैं। केंद्र संचालक ने ऑर्डर आने के बाद दवा उपलब्ध कराने की बात कही।
मुड़िला निवासी सुमित को लीवर से संबंधित दवा की जरूरत थी। बाजार में 10 गोलियों की कीमत 300 रुपये बताई गई थी। सस्ती दवा की उम्मीद में वह दो केंद्रों पर पहुंचे लेकिन दोनों जगह दवा नहीं मिली। इसी तरह मेडिकल कॉलेज स्थित जन औषधि केंद्र पर भी कुछ मरीजों को पर्चे पर लिखी सभी दवाएं नहीं मिल सकीं। संचालक ऐसे मरीजों की दवाओं का नाम रजिस्टर में दर्ज कर उपलब्ध होने पर सूचना देने की बात कह रहे हैं।
50 दवाओं का ऑर्डर, 25 से 30 ही मिल रहीं : केंद्र संचालकों के मुताबिक, न्यूरो, यूरो और महिलाओं से संबंधित बीमारियों की कुछ दवाओं की मांग अधिक है। इनमें कैल्शियम समेत कई दवाएं शामिल हैं। ऑर्डर देने के बाद भी पर्याप्त मात्रा में दवाएं नहीं मिलतीं। एक संचालक ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि यदि 50 दवाओं का ऑर्डर दिया जाता है तो कई बार 25 से 30 दवाएं ही पहुंचती हैं।
मांग बढ़ने के कारण उपलब्ध स्टॉक जल्द खत्म हो जाता है। संचालकों का कहना है कि यदि ऑर्डर के अनुसार समय पर दवाओं की आपूर्ति होने लगे तो मरीजों को काफी राहत मिल सकती है। लंबे समय तक चलने वाली दवाएं उपलब्ध नहीं होने पर मरीजों के नाम रजिस्टर में दर्ज कर लिए जाते हैं और बाद में आने पर सूचना दी जाती है।
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