सिद्धार्थनगर। हरतालिका तीज के मौके पर पति की लंबी आयु के लिए सुहागिन महिलाएं मंगलवार को निर्जला व्रत रखेंगी। कुंवारी कन्याएं योग्य वर को पाने के लिए उपवास रखेंगी।
आचार्य अच्युत रामानुजाचार्य ने बताया कि हरतालिका तीज हर वर्ष भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है।
इस दिन महिलाएं स्नान करने के बाद सोलह श्रृंगार कर शाम को माता पार्वती और शिव की उपासना करती हैं। इस बार उदयतिथि में तीज तिथि रहेगी, इसलिए पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ समय दोपहर 12:39 बजे तक है। लेकिन उसके बाद चतुर्थी का भेदन होने के कारण सामान्य रूप से चंद्र दर्शन निषेध है। इस स्थिति में चंद्रमा दर्शन करने से कलंक लगता है। यदि कोई भूल से चंद्रमा का दर्शन करले तो उसे भगवान कृष्ण के सामंतक मणि के चोरी की कथा सुनने अथवा पढ़ने से उस दोष मुक्ति मिलती हैं। सुहागिन महिलाएं चंद्रमा की पूजन करेंगी, लेकिन चंद्रमा का दर्शन नहीं करेंगी।
यह व्रत सबसे पहले माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए कुंआरी कन्या के रूप में रखा था। ऐसे में यदि इस व्रत को कुंआरी कन्या धारण करती हैं तो उन्हें मनचाहा व सुयोग वर प्राप्त करेंगी।