डुमरियागंज क्षेत्र के कसबा हललौर मे मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना गुलजार जाफरी। स्रोत विज्ञ
सिद्धार्थनगर। तहसील क्षेत्र के कस्बा हल्लौर स्थित इमामबाड़गाह वक्फ शाह आलमगीर सानी में अंजुमन गुलदस्ता-ए-मातम के तत्वावधान में आयोजित सालाना अशरे की मजलिसों का सिलसिला जारी है। सोमवार देर रात चौथी मजलिस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए।
मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना गुलजार जाफरी ने कहा कि कुरआन का अध्ययन करने से धार्मिक और दुनियावी ज्ञान में वृद्धि होती है। इसी तरह हजरत अली की जीवनी और उनकी शिक्षाओं से संबंधित पवित्र किताब नहजुल बलागा का अध्ययन भी इंसान के ज्ञान में इजाफा करता है। इसलिए सभी को कुरआन और नहजुल बलागा का नियमित अध्ययन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मजलिस-ए-हुसैन इंसान के जीवन और उसके किरदार को संवारने का काम करती है। मजलिस के माध्यम से इंसानियत, सच्चाई, नेकी और भलाई के रास्ते पर चलने का संदेश दिया जाता है। उन्होंने कहा कि हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी इंसान को सत्य और न्याय के लिए डटे रहने की प्रेरणा देती है।
मजलिस के अंत में मौलाना ने हजरत इमाम हुसैन की शहादत का मार्मिक मंजर बयान किया।