सिद्धार्थनगर। रत्नाकर नामक डाकू से जीवन यात्रा प्रारंभ कर संसार को रामायण की रचना, राम चरित्र देने वाले महर्षि वाल्मीकि सदैव हम-सभी के लिए वंदनीय है। देवर्षि नारद की शिक्षा से अपने जीवन को परिवर्तित करने के साथ तपोमय जीवन का आदर्श मार्ग प्रस्तुत करने वाले महर्षि वाल्मीकि मानव सभ्यता को सुधारवादी दृष्टिकोण की शिक्षा दी है।
उक्त बातें ब्रह्मर्षि बावरा सिद्धार्थ ममता गृह के संस्थापक चंद्रेश शास्त्री ने महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कही।उन्होंने कहा कि तमसा नदी के तट पर बहेलिया के द्वारा मारे गए क्रौच पक्षी के प्रति दया से भावुक हुए महर्षि वाल्मीकि ने बहेलिए को संस्कृत श्लोक में श्राप दे डाला। वहीं से महर्षि वाल्मीकि की काव्य यात्रा प्रारंभ हो गई, दया की भावना ने प्रभु श्रीराम के प्रति समर्पण भाव स्थापित कर दिया था। महानायक भगवान श्रीराम के जीवन के संदर्भ में रामायण की रचना करने वाले महर्षि महर्षि वाल्मीकि सदैव वंदनीय हैं। इससे पूर्व शिक्षक सुनील पाल, प्रीति कुमारी, रमेश कुमार, प्रिंसी, पुष्पा ने भी महर्षि वाल्मीकि के चित्र पर पुष्प चंदन अर्पित किया। इस दौरान शालिनी रवि, नीलम, अर्चना, रुक्मी, साहबान मौजूद रहे।