उसका बाजार। नवरात्र शक्ति आराधना का महापर्व है। इन दिनों में आदिशक्ति की पूजा, उपासना की परंपरा चली आ रही है। उसका नौगढ़ मार्ग से थोड़ी दूर पर स्थित प्राचीन समय माता मंदिर मधवापुर वासंतिक नवरात्र के इन दिनों में लोक आस्था का केंद्र है।
पूरे साल यहां पर दर्शन, पूजा, मुंडन, जनेऊ आदि का कार्यक्रम चलता है। परंतु नवरात्र के इन दिनों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ यहां जुट रही है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में यहां पड़ोसी देश नेपाल के थारू रहते थे, इन्हीं लोगों ने सबसे पहले यहां पूजा-पाठ शुरू किया था। कालांतर में लोगों की आस्था और श्रद्धा बढ़ती गई।
हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण संस्कार मुंडन, जनेऊ आदि के साथ लड़की दिखाई, सत्यनारायण कथा, अखंड हरिकीर्तन, रामचरित्र मानस का पाठ आदि होने लगा। विशेषकर नवरात्र में यहां स्थानीय श्रद्धालु के साथ पड़ोसी देश नेपाल के भी भक्त दर्शन के लिए आते हैं। यहां पूरे साल मधवापुर, पकड़ी, परसा सुकुरुल्लाह, परसा महापात्र, महुलानी, चोरई, चोरवर, तकियवा, तिघरा, मरवटिया माफी, आदि के श्रद्धालु पूजा करते हैं।