सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में शनिवार को मनोवैज्ञानिक परामर्श प्रकोष्ठ के तत्वावधान में व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में समग्र स्वास्थ्य व कल्याण पर व्याख्यान आयोजित किया गया। प्रो. नीता यादव ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को जीवन के विभिन्न आयामों में संतुलन और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित करते हैं।
मुख्य वक्ता प्रो. संदीप कुमार ने कहा कि पारिवारिक, सामाजिक, मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन के बिना जीवन अधूरा है। उन्होंने विद्यार्थियों को यह समझाया कि जैसे शारीरिक स्वच्छता हमारे शरीर को स्वस्थ रखती है, उसी प्रकार भावनात्मक स्वच्छता हमारे मन और व्यक्तित्व को संतुलित बनाए रखती है। कहा कि संयमित जीवन अपनाना हर व्यक्ति के लिए आवश्यक है। नियमित दिनचर्या, आत्म-अनुशासन, सकारात्मक सोच और सीमित इच्छाओं पर नियंत्रण रखने से जीवन अधिक संतुलित और सुखमय बनता है। उन्होंने विशेष रूप से यह रेखांकित किया कि किसी व्यक्ति का वास्तविक स्वास्थ्य और कल्याण इस बात से भी तय होता है कि वह समाज से, ईश्वर से और स्वयं से कितना जुड़ा हुआ है।
यदि इन तीनों स्तरों पर संतुलन और जुड़ाव कायम हो तो जीवन अधिक सार्थक, संतोषजनक और सफल बन जाता है। कहा कि जीवन के हर चरण में मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल उतनी ही आवश्यक है, जितनी शारीरिक स्वास्थ्य की।
उन्होंने कहा कि आजकल प्रारंभिक आयु में भी बच्चों में तनाव, अवसाद और कभी-कभी आत्महत्या के प्रयास जैसी प्रवृत्तियां देखने को मिल रही हैं।