सिद्धार्थनगर। बेहतर और सस्ते इलाज का दावा कर मरीजों का आर्थिक शोषण और जिंदगी से खेलने वाले झोलछाप का खेल थम नहीं रहा है। आए दिन उनके इलाज में लोगों की जान जा रही है या जान पर बन आ रही है।
शुक्रवार को एक दंपती ने सदर क्षेत्र में एक आरोप लगाया कि नवजात को एक्सपायर्ड दवा देने से उसकी जान चली गई है। जिम्मेदारों की अनदेखी से झोलाछाप का दायरा बढ़ रहा है, लेकिन कार्रवाई के बजाए वह हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
निजी अस्पतालों में मौत के बाद जब परिजनों की शोर प्रशासन के दरवाजे पर दस्तक होती है। चीख-पुकार के बीच जांच शुरु होती है और कार्रवाई का कोरम पूरा होता है। जिले में चौराहे से गली-मुहल्ले तक फैले इन बंगाली डॉक्टरों की डिग्री और उनकी क्लीनिक की शायद ही कभी जांच हुई हो।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि सारा सेटिंग का खेल है। निरीक्षण में जांच सबकी की जाती है, पर जिनकी सेटिंग हैं उन्हें अनदेखा कर दिया जाता है। जबकि, गांवों में आज भी लोगों का उन पर भरोसा है। उसी भरोसे का फायदा उठाकर वह आर्थिक रूप से कमर तोड़ रहे हैं।
सदर थाना क्षेत्र के सेखोनिया में इलाज से बच्चे की मौत के मामले में शिकायत के बाद पुलिस ने पुलिस शव काे पोस्टमार्टम करवाने के लिए भेज दिया है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
झोलाछाप और एएनएम पर कार्रवाई: चिल्हिया क्षेत्र के बुकनिहा खालसा निवासी पूजा पत्नी रामबहादुर ने बताया कि उपकेंद्र लुचुईया में 30 जुलाई को उसने एक बच्चे को जन्म दिया। करीब चार घंटे बाद उसे घर भेज दिया गया। एक अगस्त को बच्चे को बुखार आया तो उपकेंद्र की एएनएम को फोन करके बुलाया गया, लेकिन उसने आने से मना कर दिया।
कहने लगी किसी और को दिखाकर जांच करवा लो। इसके बाद दंपती ने कोड़रा ग्रांट सेखुवनिया चौराहे पर क्लीनिक चला रहे डॉक्टर को फोन करके जांच के लिए घर बुलाए। उसके पास न तो कोई डिग्री न ही दुकान का कोई लाइसेंस। वह घर पहुंचा और आकर बच्चे का बुखार नापा और अपने हाथ से दवा पिला दी। जब उन्होंने जिला अस्पताल लेकर जाने की बात कही तो उसने मना कर दिया। बोला कहीं मत जाओ मैंने दवा पिला दी है।
बच्चा ठीक हो जाएगा। दवा पिलाने के ठीक 15 मिनट बाद बच्चे के शरीर में रिएक्शन और कालापन होने लगा। जब तक इधर-उधर गाड़ी की व्यवस्था करते तब तक बच्चे की मौत हो गई। आरोप है कि जो दवा उसने पिलाई थी, वह तीन महीने पहले एक्सपायर्ड हो चुकी थी। उससे दवा लेकर पूछताछ की तो उसने दवा को छीनकर फेंकने की कोशिश की और वहां से भाग गया।
डायल- 112 नंबर पर पीआरवी को काॅल करने पर उसे गिरफ्तार किया गया। पीड़ित ने इस मामले में एसओ और सीएमओ को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है।