सिद्धार्थनगर। नगर पालिका क्षेत्र में बने मकान अब कर के दायरे में आएंगे। इसके लिए सर्वे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इसमें जिन मकानों का गृहकर में पंजीकरण नहीं हुआ है, उनको नोटिस जारी किया जा रहा है। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, इसके बाद नगर पालिका के डिजिटल प्लेटफाॅर्म पर मकान नंबर सहित दर्ज हो जाएगा। इसमें न सिर्फ मकान मालिक का नाम रहेगा बल्कि आबादी की चौहद्दी आदि भी अंकित रहेगी, जिससे पड़ोस का विवाद समाप्त होगा।
इसके साथ विकास की योजनाओं का सीधे तौर पर लाभ ले सकेंगे। वहीं, नगर प्रशासन से गृहकर वसूल सकेगा। साथ ही आबादी और मकान की संख्या के बारे में सटीक और सही जानकारी उपलब्ध रहेगी, जिसके जरिये सड़क, बिजली और पानी की सुविधा के लिए सीधे मोहल्ले और वहां की भौगोलिक स्थिति के बारे में जानकारी मिल सकेगी।
नगर पालिका सिद्धार्थनगर के सीमा विस्तार के बाद दायरा काफी बढ़ गया है, जहां गांव शामिल हुए हैं। वहीं, खेत और अन्य चकमार्ग पर नई आबादी तेजी से बस रही है। कुल मिलाकर शहर का दायरा कई गुना बढ़ गया है, लेकिन नगर पालिका प्रशासन के पास वास्तविक आंकड़ा नहीं है, जिससे उसे मकानों की संख्या, मार्ग और सही भौगोलिक स्थिति के बारे में सटीक जानकारी मिल सके। इसमें प्रमुख रूप से शहरी विस्तार के बाद नगर क्षेत्र में शामिल हुई आबादी और मकानों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए नगर पालिका स्तर पर व्यापक मकान सर्वे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नगर के दायरे में लगभग 40 हजार मकान आ रहे हैं।
इसमें इस सर्वे के जरिये न सिर्फ शहरी क्षेत्र में मौजूद मकानों की सही संख्या सामने आएगी बल्कि वर्षों से अधर में लटके मालिकाना हक और सीमाओं से जुड़े विवादों को भी स्थायी समाधान मिलेगा। नगर क्षेत्र में शामिल किए गए नए इलाकों को व्यवस्थित करने की दिशा में यह सर्वे एक बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है, जिससे प्रशासनिक योजनाओं को जमीन पर उतारने में भी आसानी होगी।
नगर पालिका सिद्धार्थनगर नगर सीमा का दायरा बढ़ने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण आबादी अब शहरी क्षेत्र में शामिल हो चुकी है। ऐसे में यह जरूरी हो गया था कि नगर पालिका के पास शहरी आबादी, मकानों की संख्या, रकबे और उपयोग की सटीक जानकारी हो। इसी उद्देश्य से मकान सर्वे शुरू किया गया है। सर्वे के दौरान प्रत्येक मकान का विवरण, उसका रकबा, निर्माण की स्थिति, आसपास के मकानों की जानकारी और वर्तमान उपयोग को दर्ज किया जाएगा। इससे यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि कौन-सा मकान कर योग्य है और किस पर किस श्रेणी में कर लागू होगा। नगर पालिका के जिम्मेदारों का कहना है कि यह सर्वे केवल कर वसूली तक सीमित नहीं है बल्कि शहरी विकास की मजबूत नींव रखने का माध्यम है। सही आंकड़ों और दस्तावेजों के आधार पर ही शहर को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा सकता है। आने वाले समय में इसी सर्वे के आधार पर योजनाओं का खाका तैयार किया जाएगा, जिससे शहरी इलाकों का संतुलित और व्यवस्थित विकास संभव हो सकेगा।