फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Siddharthnagar News: बीमार बना रहा पानी...खतरे में जिंदगानी

Wed, 07 Jan 2026 11:50 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
विज्ञापन
भनवापुर क्षेत्र के चिताही गांव में लाल निशान लगे देशी हैंडपंप से निकालती महिला। संवाद - फोटो : katra news
विज्ञापन
- हैंडपंप से नल तक पीने का पानी शुद्ध नहीं, फिर भी इसी का इस्तेमाल करने को लोग मजबूर
विज्ञापन

- आयरन, नाइट्रेट, आर्सेनिक देखने में साफ पर असर घातक

- ओपीडी के आंकड़े इशारा कर रहे, बीमारी का इलाज हो रहा, कारण नहीं पता

सिद्धार्थनगर। इंदौर में शुद्ध समझकर पीए गए पानी से कई लोगों की जान चली गई। जांच में पानी दूषित पाया गया। कमोबेश जिले में भी शहर से लेकर गांव तक हालात ऐसे ही हैं। दिखने में साफ नजर आने वाला पानी असल बीमारियाें का अंबार लिए हुए है। इसे पीकर जाने-अनजाने में लोग पेट, किडनी से जुड़ी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं, लेकिन वजह मालूम न होने से इलाज के बाद दोबारा उन्हें बीमारी घेर ले रही है। डॉक्टरों के अनुसार, पेट और किडनी से जुड़ी ज्यादातर बीमारियां अशुद्ध पानी पीने से हो रही हैं, जिसपर ध्यान देने की जरूरत है।
जनपद में शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के सरकारी दावों के बीच हकीकत डराने वाली है। गांव से लेकर शहर तक बड़ी आबादी आज भी अशुद्ध और प्रदूषित पानी पीने को मजबूर है। हैंडपंप, टैंकर और जार के जरिये होने वाली पानी की सप्लाई ने स्वच्छता और शुद्धता के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र सहित कई इलाकों में जांच के दौरान हैंडपंप के पानी में क्लोराइड और आर्सेनिक की मात्रा तय मानक से अधिक पाई गई है, जिसके बाद कुछ स्थानों पर हैंडपंप पर लाल निशान लगाकर चेतावनी तो दी गई, लेकिन वैकल्पिक शुद्ध पानी की व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है। स्थिति यह है कि गांवों से शहर तक हजारों लीटर पानी टैंकरों में भरकर जार के जरिये सप्लाई किया जा रहा है। इस पानी की न तो नियमित जांच हो रही है और न ही यह स्पष्ट है कि इसे कहां से और किन हालात में भरा जा रहा है। टैंकरों की सफाई, पानी के स्रोत और जार की स्वच्छता पर कोई ठोस निगरानी नहीं है। ऐसे में लोग मजबूरी में वही पानी पी रहे हैं, जो धीरे-धीरे उन्हें बीमारियों की ओर धकेल रहा है।
विज्ञापन

हैरानी की बात यह है कि अब तक जांच रिपोर्ट सामने आने के बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। सूत्रों के अनुसार, कई टैंकर संदिग्ध बोरिंग से पानी भरते हैं। इसके बाद उसी पानी को बिना शुद्धिकरण के जार में भरकर बाजार में सप्लाई कर दिया जाता है। न तो जार की ठीक से सफाई होती है और न ही पानी की गुणवत्ता की जांच। यही कारण है कि शहरों में भी लोग अनजाने में प्रदूषित पानी पी रहे हैं। कुल मिलाकर, जिले में अशुद्ध पानी की समस्या सिर्फ ग्रामीण नहीं बल्कि शहरी संकट बन चुका है। सरकारी दावे कागजों तक सीमित हैं जबकि जमीन पर हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। जब तक जांच, सख्त कार्रवाई और शुद्ध पानी की ठोस व्यवस्था नहीं होती, तब तक लोगों की सेहत पर यह संकट लगातार भारी पड़ता रहेगा।
-
नगर से गांव तक एक जैसे हालात, दूषित पानी का सेवन
नगर में होने वाली सप्लाई के पानी से बदबू आती हैं साथ ही मटमैला भी आता है। इसके सेवन से लोग पेट से संबंधित बीमारी की चपेट में आते हैं, लेकिन वह इस बात को समझ नहीं पाते हैं कि बीमारी की जड़ क्या है। वहीं, दूसरा तबका वह है जो स्वच्छ समझकर जार का पानी का खरीदता है। लेकिन, उसमें भी शुद्धता की गारंटी नहीं है। गांव शहर तक फैले पानी के कारोबार कारोड़ों की कमाई तो की जा रही है। लेकिन, भरने वाले मशीन से लेकर घरों की आपूर्ति तक में कई जगह पानी प्रदूषित हो रही है। बुधवार को नगर में बेचे जाने वाले सप्लाई के चेन की हकीकत जानने की कोशिश की गई तो हैरान करने की वाली तस्वीर सामने आई।
टैंपो पर बड़े और मटमैला टैंकर से पानी लाकर दिया जा रहा था। इसमें बड़ा वाला टैंकर तो गंदा था ही, साथ ही जिस पाइप से जार में पानी भरा जा रहा है वह भी गंदा था। एक-दो नहीं, शहर में सप्लाई करने वाली आठ से गाड़ियों पर ऐसी ही स्थिति है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में भी ऐसे ही हालात सामने आए। पानी को लेकर की जाने वाली नादानी जिंदगी के लिए कितनी खतरनाक हैं, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। बीमार की जड़ बन रहे इस कारोबार की न तो कभी जांच होती है और न ही कार्रवाई। जबकि, पूर्व में पानी की जांच में आसेर्निक, प्लोराइड आदि की मात्रा अधिक पाई जा चुकी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ दूषित पानी के सेवन से कई प्रकार की बीमारियों की गिरफ्त में आने की बात कर रहे हैं।

-
लाल निशान लगे हैंडपंप का पानी पीने को लोग मजबूर

भनवापुर।सरकार हर घर को शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए हर घर नल योजना संचालित कर रही है, मगर जिम्मेदारों के लापरवाही के कारण यह योजना केवल कागजों तक ही सिमट कर रह गई है। इसका उदाहरण भनवापुर ब्लाॅक क्षेत्र का चिताही गांव का है, जहां लोग आज भी लाल निशान लगे देसी हैंडपंप का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
भनवापुर ब्लाॅक क्षेत्र के करीब दो हजार से अधिक जनसंख्या वाले गांव चिताही में लोगों को शुद्ध पेयजल नसीब नहीं हो पा रहा है। हर घर नल योजना के तहत गांव में पानी की टंकी बन चुकी है। अधिकांश घरों तक टोटी नल भी लग गया। मगर ठेकेदार की मनमानी से गांव में बिछाई गए पाइपलाइन अभी भी जगह-जगह खुली पड़ी हैं, जिससे अभी लोगों को शुद्ध पेयजल का इंतजार करना पड़ेगा। गांव निवासी एक महिला सुबह लाल निशान लगे देसी हैंडपंप का पानी निकालती दिखी, जिसके बारे में पूछने पर बताया कि पुराना नल लगा है, जो करीब 30 से 35 फीट गहरा है। गर्मी के समय सर्वे के दौरान सफाई कर्मी ने लाल निशान लगा दिया है। हमारे पास इतनी पूंजी नहीं है कि दूसरा नल और गहरा लगवा सकें, इसलिए देसी हैंडपंप का पानी पीने की मजबूरी है।
-
स्वास्थ्य विशेषज्ञ की राय

आर्सेनिक और क्लोराइड युक्त पानी का लंबे समय तक सेवन “साइलेंट किलर” की तरह काम करता है। शुरुआत में इसके लक्षण हल्के दिखाई देते हैं, लेकिन समय के साथ यह गंभीर और जानलेवा बीमारियों में बदल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत शुद्ध पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था, नियमित जांच और लोगों को जागरूक करना बेहद जरूरी है। पानी जीवन के लिए जितना जरूरी है, उतना ही खतरनाक भी हो सकता है यदि वह अशुद्ध हो। आर्सेनिक और क्लोराइड युक्त पानी का लगातार सेवन शरीर को अंदर ही अंदर खोखला कर देता है, जबकि मानक के अनुरूप शुद्ध पानी कई गंभीर बीमारियों से बचाव करता है।
- डॉ. एसके राव, एमडी मेडिसिन
-
2.1 तक मिली आयरन की मात्रा
आकड़ों पर गौर करें तो जनपद में पूर्व में हुए पानी की जांच में आयरन की मात्रा 1.5 से 2.1 तक मिला है जबकि, 1.0 से अधिक आयरन की मात्र शरीर के लिए नुकसानदेह है। लंबे समय तक सेवन से त्वचा पर काले धब्बे, हथेली और तलवों में सख्ती, पेट और आंतों की बीमारी, लीवर व किडनी डैमेज की आशंका। इसके अलावा क्लोराइड 2.67 तक मिलता है जबकि, 1 से 1.5 तक ही सेहत के लिए जरूरी है। क्लोराइड की अधिक मात्रा पेट दर्द, उल्टी-दस्त, डिहाइड्रेशन, हाई ब्लड प्रेशर और दिल से जुड़ी समस्याएं हो सकतीं हैं। ज्यादा क्लोराइड नमक की तरह शरीर में ब्लड प्रेशर असंतुलित कर देता है। अशुद्ध पानी में बैक्टीरिया और वायरस होने से टाइफाइड, हेपेटाइटिस, डायरिया और पेचिश जैसी बीमारियां फैलती हैं।
विज्ञापन

-
पाचन तंत्र मजबूत

शुद्ध पानी से गैस, कब्ज और पेट की अन्य समस्याओं से राहत मिलती है।

किडनी और लीवर सुरक्षित

विषैले तत्व बाहर निकलते हैं, जिससे किडनी और लीवर पर दबाव नहीं पड़ता।

इम्यूनिटी मजबूत

शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, संक्रमण का खतरा कम होता है।

त्वचा और हड्डियों को लाभ

त्वचा स्वस्थ रहती है, जोड़ों और हड्डियों की कार्यक्षमता बेहतर रहती है।

-

विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह

पानी पीने से पहले उसकी जांच और शुद्धिकरण जरूरी

संदिग्ध हैंडपंप या टैंकर के पानी का सीधा सेवन न करें

संभव हो तो आरओ, उबालकर या प्रमाणित स्रोत का पानी इस्तेमाल करें

बच्चों, गर्भवतियाें और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए
-
बोले जिम्मेदार
पेजजल परियोजनाओं पर काम चल रहा है। जल्द ही पूरा करवाया जाएगा। इससे ग्रामीणों को शुद्ध पानी मिल सके। लाल निशान वाले हैंडपंप से पानी नहीं पीने की सलाह दी जाती है। हर घर जल योजना शुरु होने से समस्या दूर हो जाएगी और शुद्ध पानी मिल सकेगा।
- संजय कुमार, जायसवाल, एक्सईएन, जल निगम
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें