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Siddharthnagar News: पश्चिम से मिलन होने पर बहेगी विकास की गंगा

Wed, 21 Jan 2026 11:14 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। देश के अति पिछड़े जिले की श्रेणी में शामिल सिद्धार्थनगर जनपद के लिए शामली-गोरखपुर एक्सप्रेस-वे विकास का बूस्टर डोज साबित होगा। इस एक्सप्रेस-वे से पूरब से पश्चिम कनेक्ट होगा।
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इसके अस्तित्व में आने से विकास की रफ्तार तेजी पकड़ेगी तो पिछड़ेपन का धब्बा धूल जाएगा। सर्वे और कागजी प्रक्रिया शुरू होने से पूर्वांचल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सीधी, तेज और आधुनिक सड़क कनेक्टिविटी का सपना अब जमीन पर उतरता दिख रहा है। गोरखपुर-शामली एक्सप्रेस-वे परियोजना न केवल दूरी को कम करेगी, बल्कि दशकों से विकास की मुख्यधारा से कटे इलाकों के लिए नई संभावनाओं के द्वार भी खोलेगी।
जानकारों का मानना है कि आने वाले 10 साल में यहां बहुत कुछ बदल जाएगा, क्योंकि संभावना तो यहां बहुत थी, लेकिन कनेक्टिविटी न होने के कारण बड़े उद्योग धंधे लगाने से कारोबारी परहेज कर रहे थे। अब विकसित राज्यों से सीधे कनेक्टिविटी होगी तो बड़े उद्योग और बड़े निवेश की उम्मीदें काफी बढ़ जाएंगी। विकास के नजरिए से देखा जाए तो यह एक्सप्रेस-वे जिले के विकास में एक मील का पत्थर साबित होगा।
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जिले से गुजरने वाले शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे के लिए 66 गांवों में 70 मीटर चौड़ाई में भूमि का सर्वे किया गया है। इसके तहत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचआई) ने खेसरहा क्षेत्र में सर्वे कर कई गांवों के खेतों में झंडी लगा दिया है। झंडी वाले स्थल से दोनों तरफ 35-35 मीटर भूमि को एक्सप्रेस-वे के लिए अधिग्रहीत की जानी है। यह एक्सप्रेस-वे गोरखपुर-बस्ती मंडल के चार जिलों कुशीनगर, गोरखपुर, संतकबीर नगर व सिद्धार्थनगर से होकर गुजरेगा।
सर्वे के अनुसार एलाइनमेंट तय कर लिया गया है, एनएचएआई कार्यालय अयोध्या से प्राप्त गांवों की सूची के मुताबिक बांसी तहसील के 19, डुमरियागंज के 27 और इटवा के 20 गांवों से होकर एक्सप्रेस-वे गुजरने वाला है। इसके बाद विभाग ने ड्रोन सर्वे शुरू कर दिया है। सर्वे के बाद इन गांवों में चिह्नित हुए भूमि के गाटों की सूची मिलने पर जिला प्रशासन की तरफ से भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
यह जनपद का सबसे बड़ा एक्सप्रेस-वे होगा, जो सीधे हरियाणा और दिल्ली को कनेक्ट करेगा। सिक्सलेन होने के कारण यहां 24 घंटे आवागमन रहेगा। ऐसे में कई बड़े कारोबार, होटल, मॉल, कंपनी, फैक्ट्री और अन्य औद्योगिक ईकाई स्थापित हो सकेंगी। क्याेंकि, कच्चा माल लाने से लेकर उत्पादन सीधे बड़े शहरों तक पहुंचाना आसान होगा। बांसी कस्बे में रहने वाले सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डॉ. नरसिंह त्रिपाठी का कहना है कि यह एक्सप्रेस-वे पूर्वी यूपी और पश्चिमी यूपी के बीच एक मजबूत आर्थिक सेतु के रूप में काम करेगा। इससे व्यापार, उद्योग और निवेश की रफ्तार कई गुना बढ़ने की उम्मीद है। सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि एक्सप्रेस-वे जनपद से गुजरेगा, यह जानकर बड़ी खुशी हुई। गोरखपुर-शामली एक्सप्रेस-वे के धरातल पर उतरते ही आने वाले 10 वर्षों में इस पूरे क्षेत्र की तस्वीर पूरी तरह बदलने की संभावना है।
दिल्ली और हरियाणा जैसे बड़े व्यावसायिक व औद्योगिक केंद्रों से सीधा जुड़ाव होने पर स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार मिलेगा। परिवहन सस्ता और तेज होने से उद्योगों के लिए यह इलाका आकर्षक डेस्टिनेशन बनेगा। बड़े वेयरहाउस, फूड प्रोसेसिंग यूनिट, कोल्ड स्टोरेज और मैन्युफैक्चरिंग हब विकसित होंगे। इसके साथ ही होटल, ढाबा, पेट्रोल पंप, ट्रांसपोर्ट और सर्विस सेक्टर में भी व्यापक निवेश आएगा।
अति पिछड़े तीनों तहसील क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे पलायन पर रोक लगेगी। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण शिक्षा, स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं तक पहुंच आसान होगी और कस्बों का तेजी से शहरीकरण होगा।
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