शोहरतगढ़। महदेवा गांव में बाईपास के लिए अधिग्रहीत जमीन खाली कराने की बुधवार को हुई कार्रवाई के बाद काश्तकारों और प्रशासन के बीच विवाद और गहरा गया है। जमीन से कब्जा हटाने और करीब 170 पेड़ कटवाए जाने के बाद काश्तकारों ने अब मुआवजे को लेकर मोर्चा खोल दिया है।
काश्तकार शुक्रवार को जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करेंगे। उनका आरोप है कि कुछ जमीनों का मुआवजा दिए बिना ही कब्जा लेकर निर्माण की तैयारी की जा रही है जबकि कुछ काश्तकारों को मिला मुआवजा सर्किल रेट से कम है। महदेवा गांव के काश्तकार अश्वनी कुमार सिंह, बृजेश सिंह, कृष्ण कुमार सिंह, दिलीप कुमार सिंह, गिरिश सिंह, नीलेश कुमार सिंह, विनय कुमार सिंह, रीता सिंह, ममता सिंह, संजय सिंह और सारिका सिंह आदि का कहना है कि बाईपास के लिए उनकी जमीन एनएचएआई ने अधिग्रहीत की थी। काश्तकारों की मांग थी कि जमीन पर कब्जा लेने से पहले उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। उनका आरोप है कि इस मांग पर सहमति बनने से पहले ही प्रशासन ने पुलिस बल के साथ कार्रवाई कर दी।
काश्तकारों के मुताबिक बुधवार को एसडीएम और सीओ की मौजूदगी में चार थानों की पुलिस, पीएसी की एक बटालियन, स्पेशल पुलिस बल, महिला पुलिस, राजस्व टीम और एनएचएआई के अधिकारी मौके पर पहुंचे। इसके बाद अधिग्रहीत जमीन खाली कराई गई।
काश्तकारों का दावा है कि कार्रवाई के दौरान जमीन पर लगे करीब 170 पेड़ों को भी कटवा दिया गया। उनका कहना है कि उन्होंने 18 सितंबर को धरना-प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी लेकिन उससे पहले ही जमीन खाली करा ली गई।
अब काश्तकार मुआवजे की दर और बिना भुगतान कब्जा लिए जाने के मुद्दे को जिला मुख्यालय पर उठाएंगे। उनका कहना है कि जब तक मुआवजे से जुड़े मामलों का उचित समाधान नहीं होता, वे अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाते रहेंगे।
वहीं, एसडीएम राजेश कुमार ने बताया कि जिन काश्तकारों ने मुआवजा नहीं लिया है, उनकी धनराशि जिला मुख्यालय पर सुरक्षित रखी गई है। उन्होंने बताया कि करीब दो साल से मुआवजा नहीं लेने के कारण बाईपास का निर्माण रुका हुआ था।
एसडीएम ने कहा कि जिनकी जमीन खाली कराई गई, उनमें कुछ काश्तकार मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने प्रशासन का सहयोग भी किया।