सीएमओ कार्यालय परिसर में स्थित विकलांग प्रमाण पत्र केंद्र कार्यालय।
सिद्धार्थनगर। सीएमओ कार्यालय के वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक की जयप्रकाश शुक्ल की धरपकड़ और फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी किए जाने के मामले में जांच का दायरा बढ़ रहा है। अब मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग में तैनात एक ओडियोमेट्रिस्ट की भूमिका संदिग्ध मिली है। बताया जा रहा है कि कान से जुड़ी जांच के संबंध में बुधवार शाम दिल्ली पुलिस के जांच अधिकारी ने लंबी पूछताछ की।
इसके अलावा अचल प्रशिक्षण केंद्र में तैनात नोडल अधिकारी से काफी समय तक कार्यालय के एक कमरे में कागजात के संबंध में पूछताछ की। कागजात के साथ मौखिक क्रॉस जांच की गई। इसके बाद कुछ रिपोर्ट बनाकर लेकर चली गई। बताया जा रहा है कि पकड़े गए मलेरिया निरीक्षक से मिले इनपुट और कागजात के आधार पर नोडल और ईएनटी विभाग से जुड़े कर्मी से पूछताछ की है।
दिल्ली में पकड़े गए फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र की जांच के मामले में बुधवार को उत्तरी दिल्ली के मोरिस नगर थाने के एक दरोगा बुधवार को फिर जनपद में पहुंच गए। वह सबसे पहले सीएमओ कार्यालय पर पहुंचे, जहां दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी किए जाने वाले अचल प्रशिक्षण केंद्र के नोडल के बारे में जानकारी ली, इसके बाद नोडल अधिकारी से मिले। पकड़े में आए वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक व दिव्यांगता प्रमाणपत्र पटल के सहायक बाबू व आरोपी जयप्रकाश शुक्ल से पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर कागजात के संबंध में आवश्यक सवाल-जवाब किए। बताया जा रहा है कि एक कमरे में घंटों कागजात को लेकर पूछताछ चली। इसमें कुछ नए और पुराने कागजात और रजिस्टर को देखा। इसके बार उसने मौखिक रूप से जानकारी ली।
वहीं, जयप्रकाश से मिली लीड और प्रमाणपत्र के आधार पर माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग में पहुंचे। सूत्रों के मुताबिक यहां कान की जांच करने वाले एक ओडियोमेट्रिस्ट से मिले और एक कमरे में लेकर जाकर लगभग एक घंटे पूछताछ की गई। बताया जा रहा है कि कान से संबंधित प्रमाणपत्र में गड़बड़ी मिली है। मलेरिया निरीक्षक से कुछ लीड मिली है। इसके बाद जांच करने आई थी।
बताया जा रहा है कि जांच का दायरा और बढ़ सकता है। पूछताछ और कागजात में अंतर मिला है। बताया जा रहा है कि जैसे जांच में तस्वीर साफ होगी, मुकदमे में आरोपियों की संख्या बढ़ सकती है। जानकारी पुख्ता होते ही जद में आने वालों को पुलिस उठा लेगी।फ