भनवापुर क्षेत्र में बारिश व तेज हवा के कारण खेत में गिरी धान की खड़ी फसल। संवाद
सिद्धार्थनगर। मोथा चक्रवाती तूफान जिले के किसानों पर आफत बनकर आया है। लगातार 36 घंटे से हल्की और तेज बारी का दौर जारी है। आफत बनकर आई इस बारिश में फसल जमींदोज होकर पानी में डूब गईं हैं। एक तरफ खेत में पानी भरने और फसल गिरने से बड़ी क्षति का अनुमान है। वहीं, दूसरी ओर अधिक बारिश होने से गेहूं सहित अन्य प्रकार के फसल की बुवाई 15 से 20 दिन पिछड़ जाएगा, जिससे इसके उत्पादन पर असर पड़ेगा।
खेत में पानी में डबू और गिरी फसलों को देखकर किसान चिंतित हैं। उन्हें फसल से पूरा होने वाली जरुरत, बैंक से लिए गए कर्ज की अदायगी की चिंता सताने लगी है। बेबस होकर देखने के अलावा किसानों के पास कुछ नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक सवा लाख हेक्टेयर रकबे पर धान की फसल लगाई है। इसमें अभी 5-10 प्रतिशत भी कटाई नहीं हुई है। पड़ताल में सामने आई तस्वीरें आपको किसानों की चिंता को दिखाने वाली है।
खेत में फसल नष्ट होने का सता रहा डर: भनवापुर। पिछले तीन दिनों से बिगड़े मौसम और लगातार हो रही बारिश से किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ झलक रहीं हैं। किसानों का कहना है कि 2023 में जिस तरह बाढ़ ने आखिरी समय में धान की फसलों को नष्ट कर दिया था, कहीं इस बार भी हाथ मलते ना रह जाना पड़े।
धान के फसल पर गहराया संकट: शाहपुर। मौसम में अचानक बदलाव और बुधवार सुबह से हो रही बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में कटे धान के भीग जाने से किसान खासा परेशान हैं। किसान फसल को सहेजने और जल्द से जल्द घर लाने में जुट गए हैं। अब और बारिश हुई तो धान की फसल बर्बाद हो जाएगी।
किसानों की बढ़ी चिंता, गेहूं की बुआई भी प्रभावित: ढेबरुआ। क्षेत्र में पिछले कई दिनों से हो रही लगातार बारिश ने किसानों की मुश्कािलें बढ़ा दी है। खेतों में पानी भर जाने से धान की खड़ी फसलें बर्बाद हो गई है। कई जगहों पर धान की फसल पूरी तरह गिर चुकी है, जिससे उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है। किसानों का कहना है कि लगातार हो रही बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया है, जिससे फसल सड़ने लगी है।