- सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम, पोस्टर प्रतियोगिता और नाटक के जरिये दिया संदेश
सिद्धार्थनगर। मानसिक परेशानी से जूझ रहे लोगों की बात सुनना, उनकी भावनाओं को समझना और जरूरत पड़ने पर मनोवैज्ञानिक सहयोग उपलब्ध कराना जरूरी है। कई बार सकारात्मक माहौल और उचित मार्गदर्शन से भी लोगों को अपनी समस्याओं से निपटने में मदद मिलती है। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर शनिवार को सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने यह बात कही।
विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग और मनोवैज्ञानिक परामर्श प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने पर जोर दिया गया। विभाग प्रभारी डॉ. मुन्नू खान ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य व्यक्ति के समग्र विकास का महत्वपूर्ण आधार है। इसके प्रति जागरूकता बढ़ाना समाज की जिम्मेदारी है।
मनोवैज्ञानिक परामर्श प्रकोष्ठ के अध्यक्ष एवं सहायक आचार्य डॉ. हरेंद्र शर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। सकारात्मक वातावरण और उचित मार्गदर्शन उनके विकास में सहायक होते हैं।
अतिथि प्रवक्ता डॉ. श्रद्धा पांडेय ने कहा कि मानसिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों की बात ध्यान से सुनना और उनकी भावनाओं को समझना जरूरी है। पुनीता पाठक ने तनाव प्रबंधन, सकारात्मक सोच और भावनात्मक संतुलन के महत्व पर प्रकाश डाला। रजनीश कुमार मौर्य ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने और जरूरत पड़ने पर बिना संकोच मदद लेने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने पोस्टर प्रतियोगिता में भाग लिया और नाटक का मंचन कर मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। इस दौरान गरिमा सोनी, विजयलक्ष्मी, संध्या, आंचल गुप्ता, रुचि, साइमा शाह और जितेंद्र कुमार ने प्रतिभाग किया।