पकड़ी बाजार। क्षेत्र के डफरा स्थित हनुमान मंदिर परिसर में हनुमान जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीराम कथा के दूसरे दिन सोमवार रात कथा वाचक पं. डॉ. चंद्रशेखर रामायणी ने शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाया। कथा सुनकर पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
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कथा वाचक ने कहा कि शिव विश्वास के स्वरूप हैं और माता पार्वती श्रद्धा की प्रतीक हैं। शिव-पार्वती विवाह श्रद्धा और विश्वास के मिलन का प्रतीक है। जब तक मनुष्य के जीवन में श्रद्धा और विश्वास नहीं होगा, तब तक वह परमात्मा को नहीं समझ सकता। इसी कारण गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीराम कथा से पहले शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग वर्णित किया है।