डुमरियागज क्षेत्र के कस्बा हल्लौर स्थित दरगाह हजरत अब्बास मे आयोजित शब्बेदारी में नौहां-मातम कर
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डुमरियागंज। क्षेत्र के कस्बा हल्लौर स्थित दरगाह हजरत अब्बास में अंजुमन फिदाए अबुल फजलिल अब्बास की ओर से बृहस्पतिवार की रात तरही शब्बेदारी का आयोजन किया गया। इसमें मरसिया मजलिस आयोजित हुई। अंजुमनों के मातमी दस्ते ने सारी रात नौहा पढ़कर मातम किया। शब्बेदारी की शुरुआत अब्बास अली ने कलाम पाक की तिलावत से की। इसके बाद अंबर मेहंदी और उनके सहयोगी ने मर्सियाख्वानी की। मौलाना शहकार हुसैन जैदी ने कहा कि हजरत अब्बास कर्बला के इकलौते शहीद हैं, जिनकी दो खुसूसियत (विशेषता) है। वे गाजी भी है और शहीद भी है। मौलाना ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन के बहादुर, वफादार जांबाज भाई हजरत अब्बास ने कर्बला के मैदान में सब्र-सहनशीलता का परिचय दिया। हजरत अब्बास की रहती दुनिया तक वफा और बहादुरी की मिसाल दी जाती रहेगी।
मजलिस के बाद अंजुमनों के नौहा-मातम का सिलसिला शुरू हुआ, जिसमें अंजुमन फिदा-ए-अबुल-फजलिल अब्बास, अंजुमन गुलशने इस्लाम भौरा सादात आंबेडकर नगर, अंजुमन अब्बासिया निमौली सादात फैजाबाद, अंजुमन फरोग मातम और अंजुमन गुलदस्ता मातम हल्लौर के मातमी दस्ते ने पूरे जोशो-खरोश से नौहा पढ़कर मातम किया। संचालन माहिर नूरी जलालपुरी ने किया।