- बहेरिया गांव में श्रीमद्भागवत कथा के समापन प्रसंगों का हुआ वर्णन, भक्तिमय रहा माहौल
डुमरियागंज। क्षेत्र के बहेरिया गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में बीती रात कथावाचक आचार्य सतीश मिश्र ने भगवान श्रीकृष्ण के परम मित्र सुदामा के चरित्र और राजा परीक्षित के मोक्ष की कथा सुनाई। सुदामा और भगवान श्रीकृष्ण की मित्रता का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावुक हो उठे। कथावाचक ने बताया कि सच्ची मित्रता में धन-दौलत और ऊंच-नीच का कोई महत्व नहीं होता।
कथा में बताया गया कि सुदामा अत्यंत गरीब होने के बावजूद भगवान श्रीकृष्ण के परम मित्र थे। पत्नी के आग्रह पर वे अपने मित्र श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे। उनके पास भेंट के रूप में थोड़े से चावल थे। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मित्र सुदामा का बड़े प्रेम से स्वागत किया और उनका आदर-सत्कार किया। सुदामा बिना कुछ मांगे ही वापस लौट आए लेकिन भगवान की कृपा से उनके जीवन की गरीबी दूर हो गई। इस प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
इसके बाद कथावाचक ने राजा परीक्षित के मोक्ष की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से मनुष्य को भक्ति और सद्मार्ग की प्रेरणा मिलती है। राजा परीक्षित ने सात दिनों तक भागवत कथा का श्रवण किया और भगवान की भक्ति में लीन होकर मोक्ष प्राप्त किया। कथा के इन प्रसंगों को सुन श्रद्धालु भक्ति भाव में डूबे रहे और कथा स्थल पर भक्तिमय माहौल बना रहा।
इस दौरान ज्ञानदास प्रजापति, संदीप शुक्ला, डॉ. रजनीश, दिलीप पांडेय, रामदास प्रजापति सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।