फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Siddharthnagar News: मनरेगा का भुगतान रुका तो ठप हो गए विकास के कार्य

Tue, 18 Nov 2025 11:01 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
विज्ञापन
ग्राम पंचायत जगदीशपुर राज्य में बना मनरेगा पार्क। संवाद
विज्ञापन
सिद्धार्थनगर। मनरेगा से दो वर्ष के बीच हुए कार्यों के सामग्री मद के 137 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान नहीं हो सका है। इससे जिले की सभी 1136 ग्राम पंचायतों में विकास का पहिया थम सा गया है। आपूर्तिकर्ता फर्म बकाएदार ग्राम पंचायतों में सामग्री आपूर्ति करने से कतरा रही हैं। इससे इन गांवों में इंटरलॉकिंग और नाली निर्माण समेत अन्य विकास कार्य ठप हो गए है।
विज्ञापन

पंचायत चुनाव नजदीक आने से गले की फांस बन चुके बकाए के चलते ग्राम प्रधानों की सांसें अटकी हुई हैं। वहीं वर्तमान में 282 को छोड़ शेष 854 ग्राम पंचायतों में मनरेगा से श्रम कार्य भी बंद है, जिससे श्रमिक पलायन को मजबूर हैं।
वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में जिले के सभी ग्राम पंचायतों में मनरेगा से बड़े पैमाने पर इंटरलॉकिंग एवं नालियों समेत अन्य निर्माण कार्य कराए गए हैं। इसके साथ ही प्रशासन की मंशानुसार ग्राम पंचायतों में अन्नपूर्णा भवन, एमडीएम शेड, खेल मैदान, पार्क और आंगनबाड़ी केंद्रों का भी मनरेगा के मद से निर्माण किया गया। वहीं, वर्तमान वित्तीय वर्ष में शासन की तरफ से 2024-25 और 2025-26 में हुए मनरेगा कार्यों में लगी सामग्रियों के भुगतान के लिए धनराशि ही नहीं आई, जिससे फर्मों का लंबा बकाया हो गया। हालांकि इस वित्तीय वर्ष में वित्तीय वर्ष 2023-24 में कराए कार्यों के सामग्री मद और विभागीय कर्मियों के वेतन समेत अन्य मद में धनराशि आई थी।
विज्ञापन

विभागीय कर्मियों की मानें तो इस वित्तीय वर्ष से मनरेगा के लिए केंद्र सरकार व राज्य सरकार की तरफ से केंद्रांश और राज्यांश की धनराशि आवंटित नहीं हो पाई, जिस कारण यह स्थिति उत्पन्न हो गई है।
इससे इस वित्तीय वर्ष के साथ ही पिछले वर्ष के मनरेगा कार्यों की सामग्री का भुगतान नहीं हो सका। वहीं लगातार दो वर्षों से कराए गए कार्यों के सामग्री मद का भुगतान नहीं होने से ग्राम पंचायत सचिव और प्रधानों की सांसत हो गई है। प्रधानों का कहना है कि जिन दुकानों या फर्मों से सामग्रियों की आपूर्ति ली गई है, वह बकाया धनराशि की वसूली के लिए लगातार तकादा कर रहे हैं। इस कारण वह कर्जदार हो चुके है, यहां तक कि यह फर्म और दुकानें नए विकास कार्यों के लिए सामग्री की आपूर्ति करने से मना कर दे रहे हैं, जिससे गांवों में नए निर्माण कार्य नहीं होने से विकास ठप हो गया है।
दो वर्ष से अन्नपूर्णा भवन व एमडीएम शेड का नहीं हुआ भुगतान: जिले के 14 ब्लॉकों के ग्राम पंचायतों में मनरेगा से इंटरलॉकिंग, नाली, अन्नपूर्णा भवन और एमडीएम शेड का निर्माण कार्य कराए गए। इनकी सामग्री भुगतान के लिए भी सचिवों और प्रधानों को ब्लॉक से लेकर जिला मुख्यालय का चक्कर काटना पड़ रहा है। उसका ब्लॉक के मंझरिया में इंटरलॉकिंग कार्य कराने के बाद सचिव और प्रधान भुगतान के लिए दौड़ लगा रहे है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें